गौरीगंज (अमेठी)। पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की कोशिश में जुटी प्रदेश सरकार के निर्देश पर गोमती नदी के किनारे बसे 24 गांवों को हराभरा बनाया जाएगा। कवायद सफल हो सके इसके लिए जिम्मेदार विभाग ने तीन-तीन किसानों का चयन करते हुए जुलाई के प्रथम सप्ताह में पौधरोपण की तैयारी शुरू कर दी है। योजना के तहत फसली भूमि पर पौधरोपण हो सके व रोपित पौधे तैयार हो सकें इसके लिए किसानों को 250-250 पौधे निशुल्क दिए जाएंगे। पांच वर्ष तक अनुरक्षण के लिए किसानों को अनुदान भी दिया जाएगा।
प्राकृतिक संतुलन कायम रखते हुए अधितकम भू-भाग पर पौधरोपण कर पर्यावरण सुधार के लिए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नमामि गंगे योजना के तहत फसली भूमि पर पौधरोपण की योजना बनाई है। कवायद सफल हो सके इसके लिए मुख्य वनरक्षक का पत्र मिलने के बाद प्रभागीय वन विभाग ने मुसाफिरखाना तहसील से गुजरने वाले गोमती नदी के किनारे बसे 24 गांवों का चयन किया है। चयनित गांव में खुली बैठक कर विभाग ने तीन-तीन किसानों का चयन कार्य भी पूरा कर लिया है।
गांव व किसान चयन करने के बाद वन विभाग चयनित किसानों को उनकी पसंद के अनुसार फलदार 250-250 निशुल्क पौधे वितरित करते हुए जुलाई के प्रथम सप्ताह में पौधरोपण कराएगा। पौधरोपण के बाद पौधों की सुरक्षित करते हुए किसानों को पांच वर्ष तक अनुदान राशि विभाग की ओर खाते में ट्रांसफर होगी। प्रभागीय वनाधिकारी यूपी सिंह ने बताया कि गांव में पौधरोपण के लिए गड्ढे तैयार करने के साथ मृदा का परीक्षण कार्य पूरा हो चुका है। जुलाई के प्रथम सप्ताह में किसानों की मांग के अनुसार पौधों की आपूर्ति की जाएगी।
इन गांवों का हुआ चयन
प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय की ओर से नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत पौधरोपण के लिए भद्दौर, चंडीपुर, मोहिद्दीनपुर, गाजनपुर दुवरिया, खेममऊ, किशनी, कोछित, कोरारी, कोटवा, मकदूमपुर कला, माझगावं, मड़वा, मदियारी कला, नादी, निजामुद्दीनपुर, पाली, पिछूती, रसूलाबाद, संसारपुर, सत्थिन, शेखपुर भंडारा, शिवली, थौरी व नारा अढनपुर शामिल है।
किसानों को ऐसे मिलेगा अनुदान
प्रभागीय वनाधिकारी यूपी सिंह ने बताया कि चिन्हित किसानों को पहले वर्ष पौधरोपण करने के बाद प्रति पौध 35 रुपये, फरवरी में सत्यापन के बाद जीवित प्रति पौध 35 रुपये तो दूसरे वर्ष जीवित प्रति पौध पर 30 रुपये, तीसरे व चौथे वर्ष प्रति जीवित पौधे पर 25-25 रुपये तथा पांचवें वर्ष जीवित प्रति पौध 20 रुपये की दर से अनुदान मिलेगा। अनुदान राशि सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर की जाएगी।
पौधे तैयार नहीं करने पर होगी रिकवरी
प्रभागीय वनाधिकारी ने बताया कि नामिम गंगे योजना के तहत चिन्हित किसानों से पौधे तैयार नहीं करने तथा उनकी देखरेख नहीं करने पर निशुल्क मिले पौधे के साथ अनुदान राशि की रिकवरी की जाएगी। पौधरोपण का सत्यापन स्थानीय वन कर्मियों से कराया जाएगा।