अंबेडकरनगर। 40 क्रय केंद्रों पर अब तक एक भी छटांक गेहूं की खरीदारी नहीं हो सकी है। चार एजेंसियों के 24 क्रय केंद्रों पर 54 किसानों द्वारा 170.35 एमटी गेहूं की बिक्री अब तक की जा सकी है। गेहूं खरीद शुरू हुए एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत गया लेकिन इसमें तेजी नहीं आ सकी है। इस बार जिले को 65 हजार एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला है।
गेहूं खरीद गति नहीं पकड़ रही है। इसका मुख्य कारण क्रय केंद्रों पर किसानों की आवक कम होना माना जा रहा है। मालूम हो कि गेहूं खरीद के लिए पांच एजेंसियों के कुल 64 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। इसमें खाद्य विभाग के 12, पीसीएफ के 45, यूपीएसएस के पांच, मंडी समिति के एक व भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र शामिल हैं। गत दिवस ही जिले को 65 हजार एमटी खरीद का लक्ष्य मिला है।
एक अप्रैल से गेहूं खरीद शुरू हुई है। एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत गया लेकिन खरीद गति नहीं पकड़ सकी। खाद्य एवं विपणन विभाग कार्यालय के अनुसार अब तक 54 किसानों से 170.350 एमटी गेहूं की खरीद हुई है। इसमें खाद्य विभाग के 10 क्रय केंद्रों पर 26 किसानों ने 81 एमटी, पीसीएफ के 13 क्रय केंद्रों पर 25 किसानों ने 78.85 एमटी, मंडी समिति के एक केंद्र पर दो किसानों ने 8.30 एमटी, भारतीय खाद्य निगम के एक केंद्र पर एक किसान ने 2.20 मिट्रिक टन गेहूं बेचा है। यूपीएसएस के पांच केंद्रों पर अब तक एक भी किसान उपज की बिक्री के लिए नहीं पहुंचा है।
आढ़त पर मिल रहा ज्यादा दाम
अकबरपुर के कपिलदेव ने कहा कि बाजार में गेहूं का मूल्य सरकार के समर्थन मूल्य से अधिक है। ऐसे में क्रय केंद्र पर उपज बिक्री करने से अधिक लाभ आढ़तियों के हाथों बेचने में है। इसके चलते ही क्रय केंद्र पर न जाकर निजी दुकानों पर उपज की बिक्री की जा रही है। अच्छा दाम मिल जाता है और नकद मिलता है।
घर से ही बेच दे रहे उपज
फोटो 8 बरधाभिउरा निवासी निखिलेेश ने कहा कि क्रय केंद्र पर उपज की बिक्री करने से एक तो दाम कम मिलता है। उस पर से ढुलाई में अधिक खर्च आता है। आढ़ती घर पर ही आकर उपज की खरीदारी कर लेते हैं, नकद राशि भी देते हैं। इससे क्रय केंद्र तक बिक्री के लिए उपज ले जाने की मुश्किलों से भी राहत मिलती है।
नहीं पहुंच रहे किसान
क्रय केंद्रों पर खरीद के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं हैं। उपज की बिक्री करने के लिए क्रय केंद्रों पर किसान कम पहुंच रहे हैं। इसी के चलते खरीद गति नहीं पकड़ रही है। - राजेश कुमार, खाद्य एवं विपणन अधिकारी