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बिना पढ़े ही परीक्षा को मजबूर होंगे सवा दो लाख बच्चे

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अंबेडकरनगर। जिले के परिषदीय, सहायता प्राप्त, कस्तूरबा व आश्रम पद्धति विद्यालय में अध्ययनरत करीब सवा दो लाख बच्चों को नई पुस्तक मिलने का इंतजार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। नए सत्र में शिक्षण कार्य शुरू होने के साढ़े पांच बाद भी बच्चों को पढ़ने के लिए नई पाठ्य पुस्तकें अभी तक नही बंट पाई हैं।
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ऐसे में बच्चों को इसी माह के अंतिम सप्ताह से शुरू होेने वाली तिमाही परीक्षा बिना पढ़े ही देने की परेशानी उठानी पड़ेगी। जिम्मेदारों की लापरवाही से यह स्थिति तब है जब कि सरकार निपुण भारत मिशन के तहत अब साल में चार बार परीक्षाएं कराने की तैयारी में है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय, सहायता प्राप्त, कस्तूरबा व आश्रम पद्धति विद्यालय में अध्यनरत बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा व सुविधा दी जाती है। ड्रेस, जूता मोजा, एमडीएम आदि का भी लाभ भी अभिभावकों के खाते में सीधे पैसा भेजकर दिया जा रहा है।
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इसके बावजूद वर्तमान में सत्र शुरू हो जाने के साढ़े पांच माह बाद भी 1062 प्राथमिक, 283 कम्पोजिट, 237 उच्च प्राथमिक, कस्तूरबा के आठ, आश्रम पद्धति के एक व समाज कल्याण के 03 व 150 सहायता प्राप्त विद्यालयों के सभी बच्चों को पढ़ाई के लिए नई पुस्तकें अभी तक नहीं मिल पायी हैं।
इन विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के करीब तीन लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें से कक्षा एक, दो व कक्षा आठ के बच्चों को ही अभी तक सभी पुस्तकें मिल सकी हैं। जबकि बाकी कक्षा में पढ़ रहे सवा दो लाख बच्चों का नई किताबें मिलने का इंतजार खत्म नहीं हो पा रहा है। तमाम दावों के बाद भी अभी तक जिले में महज 45 प्रतिशत ही पुस्तकें वितरण को मिली हैं।
तीन कक्षाओं के बच्चों को ही मिली सभी पुस्तकें
विभागी अधिकारियों के अनुसार अभी तक कक्षा एक, दो व आठ के बच्चों को सभी विषय की पुस्तकें पूरी तरह वितरित हो पाई हैं। इसमें कक्षा एक की कलरव, कक्षा दो की किसलय व गिनतारा तथा कक्षा आठ की सभी 10 पुस्तकें शामिल हैं। इसके इतर कक्षा तीन, चार व पांच में चलने वाली पांच पुस्तकों में से हिंदी, गणित, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान व संस्कृत में से अधिकांश नहीं पहुंची। कक्षा छह में 13 पुस्तकों में से सिर्फ चार पुस्तकें हिंदी, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान की काफी संख्या में पुस्तकें आयी हैं। कक्षा सात में 10 पुस्तकों में से सिर्फ नाममात्र की पुस्तक पहुंची हैं।
कवर पेज बन रहा बाधा
शासन द्वारा जिले के 2034 स्कूलों में पुस्तक आपूर्ति के लिए 13 एजेंसियों को नामित किया गया है। इन एजेंसियों को अलग अलग विषय की 15 लाख पुस्तकें आपूर्ति करनी है। विभागीय सूत्रों की माने तो पर्याप्त मात्रा में पुस्तकों का कवर पेज न मिल पाने के कारण ही इनकी सप्लाई करने में परेशानी आ रही है। कवर पेज न हो पाने के कारण ही पुस्तकों को अंतिम रूप देना चुनौती बना है।
बच्चों को सभी पुस्तकें जल्द ही उपलब्ध कराने के लिए नियमित तौर पर पत्राचार किया जा रहा है। जो पुस्तकें उपलब्ध हो रही हैं, उनका सत्यापन कर विद्यालयों में पहुंचाकर बच्चों को बांटा जा रहा है। अभी तक 45 प्रतिशत के करीब ही पुस्तकें जिले को उपलब्ध हो सकी हैं।
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