25 हजार लोग आईडीए एप से हुए ठगी का शिकार, रातोंरात लखपति बनने का सपना पड़ा महंगासंवाद न्यूज एजेंसी
अंबेडकरनगर। ऑनलाइन ट्रेडिंग एप के जरिए रातोंरात लखपति बनने का सपना देखना हजारों लोगों को काफी भारी पड़ा। जिले में अब तक की सबसे बड़ी ठगी को अंजाम देते हुए ऑनलाइन कंपनी आईडीए ने ट्रेडिंग एप के जरिए करीब 25 हजार लोगों को 900 करोड़ का चूना लगाकर रातोंरात फरार हो गई। बीते चार माह से भी अधिक समय से यह कंपनी जिले में पूरी तरह सक्रिय थी। शुरुआती दौर में कंपनी ने लोगों को जोड़ने के लिए एक माह से भी कम समय में जमा की गई धनराशि का दोगुना भुगतान कर वापस किया। इससे लोग कंपनी के झांसे में आकर तेजी के साथ ऑनलाइन ट्रेडिंग एप से जुड़ने लगे। यह संख्या करीब 25 हजार तक पहुंच गई। रातोंरात कंपनी के अपना सारा कारोबार समेटकर भाग निकलने से अब लोग अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इस मामले में अकबरपुर निवासी कुलदीप गुप्त की तरफ से अकबरपुर कोतवाली व कंपनी से जुड़े छह लोगों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया है।
तीन माह तक कंपनी ने लोगों को ऑन लाइन ट्रेडिंग से जोड़ने के बाद अप्रैल माह की शुरुआत में एक विशेष ऑफर लांच किया। इसमें 24 घंटे में रकम दोगुना करने का झांसा दिया गया। लोगों ने इस पर भरोसा कर कंपनी में आंख मूंद कर पैसा जमा कर दिया। इस बीच लोगों में भरोसा कायम बनाने को कंपनी लोगों को महंगे मोबाइल, एसी व कार तक आधी कीमत पर देती रही। इसे देखकर आस पास के दूसरे जिलों के लोग भी 24 घंटे में पैसा दोगुना करने का मौका हाथ से न जाने देने के लिए कंपनी से जुड़ने लगे। इस दौरान लालच के चलते कई लोगों ने अपनी जमा पूंजी की पाई पाई तक जोड़कर लाखों रुपये कंपनी में जमा कर दिए। इस दौरान सभी को यही बताया जाता रहा कि रकम तो 24 घंटे में दोगुनी होगी, लेकिन इसकी निकासी एक सप्ताह बाद ही होगी।
12 हजार तक में मिली सदस्यता
कंपनी ने ऑन लाइन ट्रेडिंग एप आईडीए में पहले 66 सौ, फिर 9 हजार, इसके बाद 12 हजार रुपये की शुल्क राशि लेकर लोगों का पंजीयन किया। इसमें संबंधित व्यक्ति की एक आईडी बनाकर सौ डॉलर (प्वाइंट) जोड़ कर दिए जाते थे। इसके बाद किसी नए सदस्य को जोड़ने पर संंबंधित व्यक्ति के खाते में दस डॉलर अतिरिक्त जुड़ जाते थे। इसके अलावा प्रतिदिन 30 बार संबंधित एप को क्लिक करने पर डेढ़ से दो डॉलर तक भी खाते में जमा हो जाते थे। यह काम लोग आसानी से कर लेते थे। कंपनी डॉलर के बदले रुपये का भुगतान करने के लिए एक अन्य एप ओएक्सपी को प्रयोग में लाती थी।