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Ambedkar Nagar News: ट्रैक्टर-ट्रॉलियां हर साल लगा रहीं साढ़े तीन करोड़ की चपत

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अंबेडकरनगर। कृषि कार्य के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग धड़ल्ले से व्यावसायिक कामों में हो रहा है। 19 हजार से अधिक पंजीकृत ट्रैक्टरों में से सिर्फ तीन ट्रैक्टर ही व्यावसायिक काम के लिए अधिकृत हैं। ऐसे में ज्यादातर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां न सिर्फ नियमों की धज्जियां उड़ा रही हैं, बल्कि प्रति वर्ष विभाग को साढ़े तीन करोड़ रुपये के राजस्व की चपत भी लग रही है। इसके बावजूद विभाग इन पर कोई कार्रवाई करने के लिए अभियान तक नहीं चला रहा है।
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परिवहन विभाग की सुस्ती के चलते जिले में ट्रैक्टर संचालकों की मनमानी बरकरार है। कृषि कार्यों के नाम पर पंजीकृत ट्रैक्टरों का उपयोग धड़ल्ले से व्यावसायिक कामों में किया जा रहा है। जिले में 350 से अधिक ईंट-भट्ठा संचालित है। इन पर करीब दो हजार ट्रैक्टर मिट्टी से लेकर ईंट ढुलाई तक का काम करते हैं। इनमें से एक भी भट्ठा संचालक के ट्रैक्टर का पंजीयन व्यावसायिक श्रेणी में नहीं है। भट्ठा संचालक मनमाने तरीके से इन ट्रैक्टरों का संचालन कर रहे हैं।
इसी तरह जिले में संचालित दो हजार से अधिक भवन सामग्री की दुकानों पर भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से सामानों को पहुंचाया जा रहा है। इन दुकानों से संचालित ट्रैक्टरों के पंजीयन भी परिवहन विभाग में भट्ठा श्रेणी में नहीं हैं। कई अन्य प्रतिष्ठानों पर भी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग हो रहा है। सिर्फ तीन ट्रैक्टर का पंजीयन उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में व्यावसायिक काम के लिए पंजीकृत हैं। यह सभी ट्रैक्टर चीनी मिल के हैं।
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विभाग के मुताबिक व्यावसायिक पंजीयन होने पर प्रतिवर्ष ट्रैक्टर मालिक को सामान्य तौर पर 1800 रुपये के टैक्स का भुगतान करना होता है। प्रतिष्ठानों पर भले ही हजारों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रालियां चल रही हैं, लेकिन इनका पंजीयन कृषि कार्य के ही नाम पर है।
चलाया जाता है अभियान
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर संचालित ट्रैक्टरों के खिलाफ अभियान चलाया जाता है। पिछले दिनों चले अभियान में कई पर जुर्माने की भी कार्रवाई की गई है। इसके लिए प्रतिष्ठान संचालकों को लगातार हिदायत दी जा रही है।
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वीडी मिश्र, एआरटीओ
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