अंबेडकरनगर। या सकीना या अब्बास की सदाओं के बीच सोमवार को अकबरपुर नगर से सटे लोरपुर में जुलूस-ए-यौमे सकीना निकाला गया। अलम, ताबूत, अमारी व दुलदुल के साथ निकले जुलूस में अंजुमन के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की। इसके साथ ही उलेमा ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया।
अंजुमन जाफरिया की ओर से लोरपुर स्थित कर्बला में हजरत अब्बास अलैह के रौजे से जुलूस निकला। शुरुआत मौलाना सै. नूरुल हसन की मजलिस से हुई। मौलाना नूरुल ने कहा कि जब कर्बला का वाकया हुआ तो सकीना महज चार वर्ष की थीं। उन पर जो जुल्म हुए उसे बयां कर पाना मुश्किल है। सकीना को वतन जाने का बहुत अरमान था लेकिन पूरा नहीं हुआ।
सीरिया स्थित कैदखाने में उनकी शहादत हो गई। आयोजन समिति से जुड़े इरशाद हुसैन ने बताया कि देर शाम तक जुलूस में अंजुमन अजा-ए -हुसैन जफराबाद जलालपुर, अंजुमन नूरे इस्लाम जलालपुर, अंजुमन जीनतुल इस्लाम मुस्तफाबाद जलालपुर, अंजुमन मासूमिया लोरपुर, अंजुमन हुसैनिया हुसैनाबाद, अंजुमन जाफरिया लोरपुर और अंजुमन अब्बासिया पीरपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।
कर्बला स्थित रौजे जनाबे सकीना पर पहुंचकर संपन्न हुए जुलूस के दौरान मौलाना मौलाना इंतजार मेहंदी, मौलाना कैसर अब्बास सुल्तानपुर, मौलाना शबाब हैदर जलालपुर ने मजलिस को संबोधित किया। जुलूस में आने वाले लोगों को अमारी, दुलदुल, अलम व ताबूत की जियारत कराई गई।