आलापुर (अंबेडकरनगर)। शांति की खोज में मनुष्य पूरे संसार का चक्कर लगा ले। यदि उसके अंदर शांति नहीं है तो वह उसे कहीं प्राप्त नहीं कर सकता। यह विचार नयागांव स्थित वैदिक आश्रम में चल रही कथा में कथावाचक श्रीनिवास वेदांती ने प्रकट किया। कथावाचक ने कहा कि संसार को समझने से पहले स्वयं को जानना जरूरी है। भगवान शंकर को जानने से पहले खुद को पहचानना होगा। शिव का सामान्य अर्थ है कल्याण। कल्याण तभी होगा जब भगवान शंकर की आराधना की जाएगी। शिव आराधना से बड़ी से बड़ी मुसीबत टल जाती है। कहा कि कथा का प्रभाव जीवन में तभी दिखेगा, जब उसके आदर्शों को जीवन में उतारा जाएगा।