अंबेडकरनगर। मुकदमा लिखवाने से नाराजगी के चलते गोली मारकर की गई बुजुर्ग की हत्या में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट ने तीन सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। तीनों आरोपियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। कोर्ट ने कहा कि अर्थदंड न अदा करने पर तीन तीन माह के अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। मामला दो दशक पहले वर्ष 2002 में जलालपुर तहसील क्षेत्र के जैतपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है।
वादी मुन्नीलाल दलित ने दर्ज कराए केस में बताया था कि खरगपुर के तीन सगे भाइयों हरिकेश तिवारी, राजेश कुमार व दिनश कुमार ने दबंगई दिखाते हुए उनके सूअर बाड़े में आग लगा दी। उन्होंने इसका मुकदमा तीनों के खिलाफ दर्ज कराया गया था। इसी रंजिश को लेकर वे सब धमकी दे रहे थे। वादी ने कहा कि इसी मामले को लेकर घर के बाहर स्थित मड़हे में सो रहे नाना दलझू की विपक्षियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। गांव के कई लोग घटना के चश्मदीद गवाह भी थे।
मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया था। पुलिस ने बाद में आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर भी लगा दिया था। विशेष न्यायाधीश एससी एसटी एक्ट रामबिलास सिंह ने मामले की सुनवाई के दौरान गैंगस्टर से जुड़ा कोई साक्ष्य नहीं पाया। सेवानिवृत्त हो चुके सीओ महेंद्र प्रताप सिंह ने बयान दर्ज कराया कि उन्हें यह याद नहीं है कि उन्होंने एसपी से स्वीकृति ली थी या नहीं। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को इसके बावजूद हत्या व दलित उत्पीड़न के मामले में दोषी करार दिया।
बृहस्पतिवार को जज रामबिलास सिंह ने तीनों सगे भाइयों को हत्या व दलित उत्पीड़न में आजीवन कारावास की सजा सुनाई। दोनों आरोप में कुल 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड तीनों पर लगाया गया।