अंबेडकरनगर। निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले ने सरगर्मी बढ़ा दी है। अगर हाईकोर्ट के फैसले पर चुनाव हुआ तो वार्डों में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित 34 पद के साथ ही अध्यक्ष के दो पद भी सामान्य श्रेणी के हो जाएंगे।
अध्यक्ष तथा वार्डों में सरकार द्वारा आरक्षण लागू किए जाने के चलते चुनावी दौड़ से बाहर हुए 200 से अधिक दावेदारों तथा उनके समर्थकों के चेहरे मंगलवार को कोर्ट का फैसला आने के बाद खिले दिखे। घर बैठ गए दावेदार व उनके समर्थक भी एक बार फिर से नए जोश के साथ मैदान में उतरने की तैयारियों में दिखे।
हाईकोर्ट ने निकाय चुनाव को लेकर राज्य सरकार द्वारा जारी पिछड़ा वर्ग आरक्षण की अधिसूचना को ही रद्द कर दिया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि पिछड़ा वर्ग का आरक्षण जारी रखने के लिए आयोग का गठन करने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प खुला भी हुआ है। इसके बावजूद हाईकोर्ट के फैसले ने निकाय क्षेत्रों में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
जानकारों की माने तो हाईकोर्ट के फैसले पर यदि चुनाव होता है तो अकबरपुर नगर पालिका में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित अध्यक्ष पद तथा राजेसुल्तानपुर नगर पंचायत में अन्य पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित अध्यक्ष पद सामान्य श्रेणी में तब्दील हो जाएगा।
इसी तरह अकबरपुर नगर पालिका में छह वार्ड , टांडा नगर पालिका में छह तथा जलालपुर नगर पालिका में छह वार्ड पिछड़ा वर्ग व पिछड़ा वर्ग महिला की बजाए सामान्य श्रेणी में तब्दील हो सकते हैं। इल्तिफातगंज, जहांगीरंगंज, राजेसुल्तानपुर व अशरफपुर किछौछा नगर पंचायत के चार चार वार्ड भी पिछड़ा वर्ग की बजाए सामान्य श्रेणी के हो जाएंगे।
मंगलवार को नगर निकाय से जुड़े वार्डों में कहीं खुशी कहीं गम देखने को मिला। कोर्ट के फैसले से उन दावेदारों को सबसे ज्यादा खुशी हुई जो आरक्षण के चलते चुनाव लड़ने की उम्मींद छोड़ चुके थे।
इससे अध्यक्ष पद से लेकर सभासद पद के लगभग दो सौ दावेदारों तथा उनके समर्थकों में खुशी दिखी। कोर्ट के आदेश के बाद चुनाव लड़ने से किनार कसने वाले प्रत्याशी अब एक बार फिर से मुकाबले में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कवायद में जुटने की तैयारी में लग गए हैं।