अंबेडकरनगर। पांच बहनों के इकलौते भाई को परिवहन निगम की बस ने शनिवार देर रात बसखारी मार्ग पर पलई रामनगर के निकट रौंद दिया। राखी से ठीक पहले युवक की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है। वहीं बाइक सवार उसके मौसा गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने युवक के शव को पोस्टममॉर्टम के लिए भेज अन्य प्रक्रिया शुरू कर दी है।
थाना क्षेत्र जहांगीरगंज के बेबीराम फत्तेपुर खास गांव निवासी अंशुमान (20) शनिवार को परिवार के साथ हंसवर थाना क्षेत्र के सेमरा नसीरपुर गांव में नानी की तेरहवीं में शामिल होने के लिए गया था। देर शाम अचानक उसकी मामी ज्योति की तबीयत खराब हो गई। इस पर अंशुमान अपने मौसा फूलचंद्र (30) के साथ मामी को लेकर बाइक से अकबरपुर नगर स्थित एक अस्पताल पहुंचा। साथ में परिवार के अन्य सदस्य भी दूसरे वाहन से यहां पहुंचे। मामी को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद अंशुमान अपने मौसा के साथ बाइक से वापस जाने लगा। बाइक अंशुमान चला रहा था।
बताया जाता है कि जब वे सम्मनपुर थाना क्षेत्र के पलई रामनगर के निकट पहुंचे तो इसी बीच सामने से आ रही परिवहन निगम की बस ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। बाइक चला रहे अंशुमान का हेलमेट इस बीच झटका लगने से सिर से निकलकर दूर जा गिरा। दोनों बाइक सवार सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गए।
दोनों को स्थानीय लोग जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां चिकित्सकों ने अंशुमान को मृत घोषित कर दिया। उसके सिर में गंभीर चोट आई थी। उधर हालत गंभीर होने पर उसके मौसा को ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया गया।
वाहन छोड़कर भागा चालक
घटना के बाद जब आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे तो अंधेरे का लाभ उठाकर चालक व परिचालक बस छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए। बस में यात्री बैठे हुए थे। बाद में अलग-अलग वाहन की व्यवस्था कर यात्री अकबरपुर बस स्टेशन पहुंचे। इसके बाद गंतव्य तक जाने के लिए उन्होंने दूसरी परिवहन निगम की बस का सहारा लिया। इसमें यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने इस बीच नाराजगी भी व्यक्त की। उनका कहना था कि घटना के संबंध में जिम्मेदारों को जानकारी दी गई लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।
गम में बदलीं पर्व की खुशियां
अंशुमान पांच बहनों में इकलौता भाई था। सोमवार को मनाए जाने वाले रक्षाबंधन पर्व को लेकर बहन किरन, रीना, खुशबू, अंतिमा व प्रियंका ने बढ़-चढ़कर तैयारियां भी कर ली थीं। दरअसल अंशुमान सबसे छोटा था, इसलिए वह बहनों का लाडला था। चार बहनों का विवाह हो चुका है जबकि एक बहन का विवाह होना अभी शेष है। ग्रामीणों के अनुसार रक्षाबंधन पर्व पर सभी बहनें एकत्र होती आई हैं। इस बार भी सभी बहनों ने पर्व को लेकर खरीदारी पूरी कर ली थी। सभी को बस इंतजार था सोमवार का जब वे सभी घर पहुंचकर भाई की कलाई पर राखी बांधतीं। हालांकि वक्त ने उनकी खुशियों पर पानी फेर दिया। बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यहीं कह रहीं कि अब किसकी कलाई पर राखी बाधेंगी।
टूट गईं माता-पिता की उम्मीदें
पिता हंसराज व माता लालमती को अंशुमान से बड़ी उम्मीदें थीं। वह घर का इकलौता चिराग था। अंशुमान बीए प्रथम वर्ष का छात्र था। परिजनों के अनुसार वह बहुत ही होनहार व हंसमुख था। माता-पिता का कहना था कि उनका बेटा उनका नाम रोशन करेगा। परिजनों का मानना था कि जब अंशुमान पढ़ लिखकर कुछ बन जाएगा तो प्रियंका का विवाह धूमधाम से करेंगे। हालांकि एक हादसे ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया। पिता का जहां रो-रोकर बुरा हाल है तो वहीं मां बार-बार बेहोश हो रही थी।