अंबेडकरनगर। आकस्मिक स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर जिला अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मंगलवार को सुबह नौ बजे तक अस्पताल का मुख्य गेट ही नहीं खुला। अवकाश का दिन होने के चलते साढ़े 11 बजे अस्पताल बंद हो गया।
ऐसे में मरीजों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। ज्यादातर मरीजों को मायूस हो लौटना पड़ा। मरीजों व तीमारदारों ने जिम्मेदारों की मनमानी पर नाराजगी जताते हुए जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
दीपावली पर्व पर किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं चुस्त-दुरुस्त रखे जाने का निर्देश था। 28 बेड आरक्षित करने के साथ ही स्टॉफ की भी तैनाती की गई थी। दीपावली के दिन तो स्वास्थ्य सुविधाएं चुस्त-दुरुस्त दिखीं लेकिन इसके बाद पूरी तरह से लापरवाही नजर आई।
मंगलवार को अवकाश था। अवकाश के दिनों में ओपीडी सुबह आठ बजे से साढ़े 11 बजे तक रहती है जबकि इमरजेंसी सेवा 24 घंटे रहती है। मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने को लेकर लापरवाही का आलम यह कि सुबह नौ बजे तक जिला अस्पताल का मुख्य गेट ही नहीं खुल सका।
मरीज इलाज के लिए सुबह आठ बजे पहुंच गए लेकिन मुख्य गेट बंद होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। नौ बजे के बाद मुख्य गेट तो खुला। ओपीडी भी शुरू हुई लेकिन ज्यादातर चिकित्सक विलंब से पहुंचे। इस बीच बड़ी संख्या में मरीज भी पहुंच चुके थे। हालांकि साढ़े 11 बजते-बजते एक बार फिर से चिकित्सक चले गए। ऐसे में कुछ मरीज ऐसे भी थे जो बिना इलाज कराए ही लौट गए।
एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचे कटरिया निवासी अनंतराम ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बेटे को एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाना था। नौ बजे अस्पताल पहुंच गए थे। मुख्य गेट बंद था। जब इस संबंध में सीएमएस को फोन किया तो इसके बाद गेट खुला। लगभग 10 बजे इंजेक्शन लग सका। उन्होंने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
एक अन्य मरीज मोतीलाल ने बताया कि उन्हें बुखार है। पौने नौ बजे जिला अस्पताल पहुंचे लेकिन मुख्य गेट बंद था। काफी देर बाद गेट खुला। चिकित्सक भी विलंब से आए। साढ़े 10 बजे इलाज सुनिश्चित हो सका। कई मरीज ऐसे थे जिन्हें इसी प्रकार की मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
सुबह आठ बजे अस्पताल खुलने का निर्देश है। शिकायत मिली है। इसकी जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस