अंबेडकरनगर। रविवार अब तक का सबसे ठंडा दिन रहा। गलन भरी ठंड से समूचा जिला ठिठुर उठा। बादल व सर्द हवाओं ने लोगों को घरों व प्रतिष्ठानों में दुबके रहने पर मजबूर कर दिया। जरूरी काम से निकलने वाले लोग जगह-जगह जल रहे अलाव का सहारा लेते दिखे। बाजारों में पसरे सन्नाटे के बीच दुकानदार खरीदारों के आने का इंतजार करते रहे। गर्म कपड़ों की दुकानों पर जरूर लोग खरीदारी करते दिखे। लेकिन अन्य दुकानों पर ग्राहकों की आमद कम दिखी।
वैसे तो बीते कई दिनों से ठंड का प्रकोप है लेकिन रविवार का दिन सबसे ठंडा महसूस किया गया। बादल व सर्द हवाओं ने गलन बढ़ा दी। पूरे दिन धूप नहीं निकली। ठंड से ठिठुरते लोग घर से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके। रविवार के अवकाश के चलते भी लोग घरों में दुबके रहे। इससे अकबरपुर के अलावा अन्य बाजारों व प्रमुख सड़कों पर लगभग पूरे दिन सन्नाटे का माहौल रहा।
दुकानदारों ने दुकान तो खोली लेकिन पूरे दिन खरीदारों का इंतजार करते रहे। सन्नाटे के माहौल में दुकान के बाहर अलाव जलाकर ठंड से बचने के साथ ही प्राण प्रतिष्ठा व मौजूदा राजनीति पर चर्चा करते दिखे। इन सबके बीच दुकानदारों के चेहरे पर चिंता की लकीरें भी दिखीं। उनका कहना था कि यदि इसी प्रकार का मौसम आगे भी रहा तो कई प्रकार की आर्थिक मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
गर्म कपड़ों की बढ़ी बिक्री
कड़ाके की ठंड का का एक तरफ जहां प्रतिकूल प्रभाव कई प्रकार के व्यवसाय पर पड़ रहा है तो वहीं गर्म कपड़ों की बिक्री में वृद्धि होने से संबंधित दुकानदारों के चेहरे खिल उठे। नई सड़क पर गर्म कपड़ों के विक्रेता नाजिम अली ने कहा कि पुराना स्टॉक खत्म होने के बाद बीते दिनों नया स्टॉक मंगाया था वह भी खत्म हो गया। अब नया आर्डर दिया है। शहजादपुर के संदीप कुमार व अमरजीत ने कहा कि शुरुआती दौर में लग रहा था कि ठंड नहीं पड़ेगी। इससे मायूस था। हालांकि जिस प्रकार से मौसम ने करवट ली है, उससे गर्म कपड़ों का बेहतर व्यवसाय हो रहा है।
चिंता में पड़े किसान
सर्द हवाओं के बीच बादल होने से किसानों की चिंता बढ़ गई। अकबरपुर के किसान राहुल व गोपाल ने कहा कि यदि बारिश हुई तो आलू व चना की फसल पूरी तरह से नष्ट हो जाएगी। आलू पर पाला भी पड़ने लगा है। भीटी के रामबख्श सिंह, बूढ़नपुर के महेश कुमार व चांदपुर के उमापति ने कहा कि यदि तेज व ओले के साथ बारिश हुई तो आलू, सरसों, अरहर, मटर व चने की फसल को व्यापक नुकसान होगा। ऐसा होने से संबंधित किसानों को बड़ी आर्थिक चपत लग सकती है।