राजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के बाबा ब्रह्मचारी मुमुक्षु आश्रम इंदौरपुर घिन्हापुर में श्रीमद्भागवत महापुराण अष्टोत्तरशत पारायण महायज्ञ व कथा का आयोजन किया जा रहा है। सातवें दिन बुधवार को प्रवाचक डॉ. संत शरण त्रिपाठी ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन किया। प्रवाचक ने कहा कि श्रीकृष्ण और गोपियों की लीला केवल प्रेम की कथा नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का रहस्य है। जिस प्रकार गोपियां श्रीकृष्ण में लीन थीं, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने अहंकार, लोभ और मोह को त्याग कर ईश्वर में एकाग्र होना चाहिए। भक्ति का सर्वोच्च रूप समर्पण है। साहस, सत्य और धर्म के साथ खड़ा होना ही जीवन का सर्वोच्च कर्तव्य है। जरासंध के 18 बार आक्रमण के बाद भगवान ने समुद्र के मध्य में द्वारका नगरी का निर्माण कराया। परिस्थितियों से भागना नहीं, बल्कि उनका समाधान खोजकर नया मार्ग बनाना ही सच्चा पुरुषार्थ है। इस दाैरान पीठाधीश्वर सत्यव्रत ब्रह्मचारी, अनिल पांडेय, बालमुकुंद दूबे, बसंत गुप्ता व अन्य उपस्थित रहे। बृहस्पतिवार को भंडारे के साथ कथा का समापन किया जाएगा।