खतरे के निशान से सिर्फ 11 सेंटीमीटर नीचे है नदी
संवाद न्यूज एजेंसीराजेसुल्तानपुर (अंबेडकरनगर)। उफान पर चल रही सरयू नदी के पानी से रविवार को प्रसाद कुर्मी का पूरा व पटपरवा जाने वाला मार्ग पूरी तरह से जलमग्न हो गया। प्रसाद कुर्मी का पूरा संपर्क मार्ग पर तो नाव का संचालन शुरू कर दिया गया है। इसके साथ ही करिया लोनिया का पूरा व हंसू का पूरा गांव के भी अत्यंत निकट बाढ़ का पानी पहुंच गया। इस बीच न सिर्फ अधिग्रहीत की गई 11 नावों को भी अलर्ट मोड में कर दिया गया है।
सरयू नदी के जलस्तर में वृद्धि का दौर लगातार जारी है। रविवार को जलस्तर 85.44 मीटर पहुंच गया जो कि खतरे के निशान 85.56 मीटर से महज 12 सेमी ही नीचे है। माना जा रहा है कि सोमवार शाम तक जलस्तर लाल निशान से ऊपर पहुंच जाएगा। इस बीच जलस्तर में हो रही वृद्धि के बीच रविवार को अराजी देवारा ग्राम पंचायत के दर्शननगर से कुर्मी प्रसाद का पूरा सपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में डूब गया। इससे लगभग एक हजार की आबादी को आवागमन में दिक्कत होने लगी। इसे देखते हुए संबंधित मार्ग पर नाव का संचालन रविवार सुबह से ही प्रारंभ कर दिया गया। इसके अलावा माझा कम्हरिया के पटपरवा से नदी की तरफ जाने वाला संपर्क मार्ग भी नदी के पानी में पूरी तरह से डूब गया। हालांकि अभी इस मार्ग पर नाव का संचालन नहीं शुरू हुआ है।
इसके साथ ही बाढ़ का पानी हंसू का पूरा व करिया लोनिया का पूरा मजरे के अत्यंत निकट पहुंच गया। ऐसे में माना जा रहा है कि जलस्तर बढ़ने के बीच बाढ़ का पानी कभी भी संबंधित मजरों के अंदर पहुंच सकता है। उधर कम्हरिया स्थित धर्मशाला व शिवमंदिर के परिसर तक भी बाढ़ का पानी रविवार दोपहर तक पहुंच गया।
उधर तेजी से बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने अराजी देवारा में स्थापित बाढ़ चौकी के साथ ही अधिग्रहीत की गई 11 नाव को भी अलर्ट मोड में कर दिया है। इस बीच अराजी देवारा व माझा कम्हरिया के दो दर्जन मजरों की लगभग 15 हजार की आबादी की चिंता भी बढ़ने लगी है। निषाद बस्बी, ढोलबजवा, हंसू का पूरा के ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से बचाव के लिए समय रहते जिम्मेदारों को ठोस कदम उठाना चाहिए।
उधर एसडीएम आलापुर सदानंद सरोज ने बताया कि कुर्मी प्रसाद का पूरा संपर्क मार्ग पर नाव का संचालन प्रारंभ कर दिया गया है। जलस्तर पर लगातार निगाह रखी जा रही है। बाढ़ से निपटने व प्रभावितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की समुचित व्यवस्था की गई है। ग्रामीणों को किसी भी प्रकार से परेशान होने की जरूरत नहीं है।