अंबेडकरनगर। पानी के बीच तख्त पर सोना और बाहर से आने वाली खाद्य सामग्री खाकर जीना बाढ़ पीड़ितों की मजबूरी बन गया है। सरयू के बाढ़ से प्रभावित माझा क्षेत्रों में लोगों का जीना लगातार दुश्वार होता जा रहा है। बाढ़ के पानी से घिरे उल्टहवा ग्राम पंचायत के करीब 20 परिवारों के घरों में बाढ़ का पानी घुस जाने से चूल्हे नहीं जल पा रहे हैं।
सरयू नदी में आयी बाढ़ के कारण टांडा तहसील के माझा क्षेत्रों में नदी का पानी कई गांवों में घुस चुका है। लगातार बढ़ते नदी के जलस्तर के कारण जल्द ही इसके कई नए इलाकों को अपनी चपेट में लेने की आशंका बनी है।
इनमें माझा उल्टहवा , कुसमौलिया, जालिम का पूरा, दिलशेर का पूरा, बाबूराम का पूरा, सत्तहवा, केवटाही व सरपताही गांवों में जो घर थोड़ी ऊंचाई पर बने हैं, वही पर सभी बाढ़ पीड़ित परिवारों के लिए भोजन इत्यादि की व्यवस्था हो रही है।
बाहर का भोजन करने के बाद पीड़ित अपने घर की रखवाली के लिए रात पानी के बीच ही तख्त या चारपाई पर सोकर गुजारने को मजबूर है। प्रभावित इलाकों में आवागमन के साथ ही पशुओं के समक्ष भी चारे का बड़ा संकट बना हुआ है।
ऐसे में ग्राम प्रधान शिवप्रसाद यादव की अगुवाई में गांव के लोग एकजुटता के साथ इस संकट के दौर में एक दूसरे की मदद पहुंचाने में जुटे हैं। ग्राम प्रधान ने बताया कि सबसे ज्यादा परेशानी जालिम का पूरा निवासी जनार्दन, मंगरू, जुगानी, इंद्रेश, दिलशेर का पूरा निवासी झब्बर, संदीप व जंगली, बाबूराम का पूरा निवासी राजदेव व हरीलाल, केवटाही निवासी बासमती, कुसमौलिया निवासी रामजनम व हीरालाल आदि के घरों में घुसे बाढ़ के घुटने भर पानी के कारण हो रही है।