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Ambedkar Nagar News: पूर्णिमा स्नान के साथ आज शुरू होगा श्रवणक्षेत्र मेला

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श्रवणक्षेत्र धाम में आकर्षक ढंग से सजाई बोटिंग के लिए नाव। -संवाद - फोटो : AMBEDKAR NAGAR
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श्रवणक्षेत्र (अंबेडकरनगर)। मातृ पितृ भक्ति के प्रतीक श्रवणकुमार की तपोस्थली में गुरुवार 8 दिसंबर को अगहन पूर्णिमा स्नान के साथ पांच दिवसीय मेले का शुभारंभ होगा। श्रवणक्षेत्र के मडहा बिसुही संगम तट पर श्रद्धालु डुबकी लगाने के साथ ही श्रवण कुमार की पूजा अर्चना करेंगे। मेले में कई जिलों से आई अलग-अलग तरह की दुकानें सज चुकी हैं। मेलार्थियों को आकर्षित करने के लिए मेले में मनोरंजन से जुड़े कई तरह के संसाधन पहुंचे हैं।
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लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बिंदु श्रवणक्षेत्र धाम गुरुवार को एक बार फिर अटूट आस्था का गवाह बनेगा। अगहन पूर्णिमा स्नान व पूजन के लिए जहां संगम तट पर श्रद्धालु पहुंचेंगे, वहीं पांच दिनों तक चलने वाले मेले का मेलार्थी खूब लुत्फ उठाएंगे। मेला शुरू होने को लेकर व्यापारी खासे उत्साहित हैं। मेले में जिले के अलावा अयोध्या व सुल्तानपुर जनपद के श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अयोध्या से पहुंची मोटर बोट
पहली बार श्रवणक्षेत्र के मेले में मेलार्थी बोटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे। इसके लिए अयोध्या से एक आकर्षक मोटरबोट भी पहुंच चुकी है। मोटर वोट संचालक रमेश मिश्र ने बताया कि बोटिंग के लिए 30 रुपये निर्धारित किया गया है। पांच मिनट तक मड़हा व बिसुही नदी के संगम में श्रद्धालुओं को नाव की सैर कराई जाएगी। इसके साथ ही मेले में प्रतापगढ़, रायबरेली, उन्नाव, लखनऊ, अयोध्या सहित आस पास के कई जनपदों से झूला, सर्कस, जादूगर, ब्रेक डांस जैसे मनोरंजन के साधनों व कार्यक्रमों का प्रबंध किया गया है। लकड़ी से बने फर्नीचर, कपड़ा, शृंगार के सामान सहित अन्य दुकानें मेले में सज चुकी हैं। श्रवणक्षेत्र पुलिस चौकी ने सुरक्षा तैयारियां को पूरी कर ली है।
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श्रवणधाम का है विशेष महत्व
श्रवणक्षेत्र धाम की प्राचीनता त्रेतायुग से जुड़ी है। मातृ पितृ भक्ति के प्रतीक श्रवण कुमार व उनके माता पिता की समाधि स्थल यहीं हैं। प्रचलित है कि श्रवणकुमार अपने दृष्टिबाधित माता पिता को कांवड़ में बिठाकर तीर्थ भ्रमण पर निकले थे। भ्रमण करते हुए वे मड़हा बिसुही के इस संगम तट पर पहुंचे। माता-पिता की प्यास बुझाने के लिए नदी से पानी लेने गए। अयोध्या के राजा दशरथ शिकार करते हुए यहां पहुंचे थे। नदी से आ रही आवाज को सुनकर राजा दशरथ ने शब्दभेदी बाण मार दिया। इससे श्रवण कुमार घायल हो गए। बाद में उन्होंने यहीं पर अंतिम सांस ली। पुत्र वियोग में उनके माता पिता ने भी यहीं पर अपने प्राण त्याग दिए। इसके बाद से इस स्थान को श्रवणक्षेत्र के नाम से ख्याति मिल गई।
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