अंबेडकरनगर। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर दवाओं के संकट से जूझ रहा है। यहां कई महत्वपूर्ण दवाओं का टोटा है। इससे बेहतर व निशुल्क इलाज की उम्मीदें लेकर पहुंचने वाले मरीजों व उनके तीमारदारों को तगड़ा झटका लग रहा है। कई तरह की दवाएं उन्हें बाहर से लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे उन्हें आर्थिक चपत लग रही है। राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर बेहतर व निशुल्क इलाज का बड़ा केंद्र मरीजों के लिए माना जाता है। यहां न सिर्फ अंबेडकरनगर बल्कि ईदगिर्द के जनपदों से भी बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। यहां डेढ़ हजार से अधिक की ओपीडी प्रतिदिन होती है। लेकिन इस समय यहां मेट्रोनिडाजोल इंजेक्शन, विंटर्ब डी, क्लोबसेव, बेस्ड्रिम, इथिस्लोन, मोस्टनजस रिस्टोर्स, किमराल, इवान समेत कई अन्य महत्वपूर्ण दवाओं की कमी है। एंटीबॉयोटिक इंजेक्शन के साथ मुख्य रूप से त्वचा रोग की दवाएं शामिल हैं। नतीजा यह है कि मरीजों को कई दवाएं निजी मेडिकल स्टोर से खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। इसमें उन्हें आर्थिक चपत भी लगती है।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार ऊपर से ही दवाएं नहीं उपलब्ध हो रही हैं। इसके लिए कई बार पत्र भी भेजा जा चुका है। जो दवाएं उपलब्ध हैं उन्हें मरीजों को अस्पताल से उपलब्ध कराया जा रहा है।
नहीं मिली त्वचा रोग की दवा
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जाफरगंज निवासी रामकेवल राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में इलाज के लिए पहुंचे थे। शनिवार को परिसर में मिले रामकेवल ने कहा कि स्किन बीमारी है। पिछले तीन माह से इलाज करा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में इसकी दवा नहीं है। बाहर से दवा लेनी पड़ती है। प्रत्येक बार लगभग एक हजार रुपये की दवा पर खर्च आता है। यदि अस्पताल में दवा होती तो यह खर्च बच जाता।
इक्कीस सौ रुपये में खरीदी दवा
अकबरपुर नगर के शहजादपुर निवासी तीमारदार मुन्नी ने कहा कि बीते दिनों ही बेटी बिंदु के कान का ऑपरेशन हुआ था। कुछ दवाएं अस्पताल में नहीं थीं। निजी मेडिकल कॉलेज से 2100 रुपये में दवा की खरीदारी की थी। अभी भी कुछ दवाएं बाहर से लेनी पड़ती है। उम्मीद थी कि अस्पताल से ही सभी दवाएं मिल जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
ऑपरेशन में बाहर से लेनी पड़ी दवा
आजमगढ़ निवासी गोविंद ने राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में पैर का आपरेशन चार दिन पहले कराया था। शनिवार को कहा कि आपरेशन के समय दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ी थी। उम्मीद थी कि आगे दवाएं अस्पताल से ही मिल जाएंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जो भी दवाएं डॉक्टर लिखतेे हैं उन्हें बाहर से ही लेनी पड़ती हैं। इससेे आर्थिक चपत लग रही है।
जल्द मिलेंगी सभी दवा
कुछ दवाएं नहीं हैं। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। वैकल्पिक प्रबंधों से यह कोशिश होती है कि ज्यादातर मरीजों का इलाज हो जाए। सभी तरह की दवाएं उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। -डॉ. अमीरुल हसन, प्राचार्य