अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय लोक अदालत शनिवार को 50321 मुकदमों का निस्तारण कराने में सफल हुई। 10 उपभोक्ताओं को 1556372 रुपये की क्षतिपूर्ति दिलवाई गई जबकि बैंकों ने लगभग पौने दो करोड़ रुपये समझौते के तौर पर वसूल किया।
जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष रामसुलीन सिंह ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पुराने कचहरी परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अनिल कुमार सिंह प्रथम ने किया। इसके बाद कुल 12 अदालतें लगाई गईं। इनमें एक-एक कर मुकदमों का तेजी से निस्तारण हुआ। स्थायी लोक अदालत अध्यक्ष अब्दुल कय्यूम ने एक, जबकि पारिवारिक न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ने 16 मामलों का निस्तारण किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधा यादव ने सबसे अधिक 5007 मामलों का निपटारा करते हुए पौने दो लाख रुपये अर्थदंड लगाया। सिविल जज सीनियर डिवीजन ज्योत्सना मणि ने 202, जबकि अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गार्गी ने 812 मामलों का निपटारा किया। सिविल जज जूनियर डिवीजन मेघा चौधरी ने तीन सौ मामलों का निपटारा किया। सिविल जज जूनियर डिवीजन टांडा अभिषेक सिंह ने 658 मामलों का निस्तारण कर 10 लाख रुपये से अधिक का उत्तराधिकार प्रमाणपत्र जारी किए।
अपर जिला जज भारतेंदु प्रकाश गुप्त ने बताया कि जनपद न्यायालय में 7122 वाद, राजस्व न्यायालयों में 15710 वाद, बिजली विभाग ने 4100, अन्य राजकीय विभागों ने 20757 मामले निपटाए। बैंकों की तरफ से 832 प्रकरण का निपटारा किया गया। लोक अदालत में न्यायिक अधिकारियों रामबिलास सिंह, मोहन कुमार, सुशील कुमार, परविंद कुमार, राजन राठी, जान्हवी वर्मा के अलावा कई विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
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सुलह तो कर लिया, नहीं मिले दिल
अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को छह वर्ष से चले आ रहे मुकदमे में दो भाइयों ने समझौता तो कर लिया लेकिन उनके दिल नहीं मिल सके। सिर्फ कोर्ट कचेहरी के चक्कर लगाने से बचने के लिए हुए इस समझौते का एक पक्ष यह भी दिखा कि दोनों भाई पास-पास खड़े होकर खुशियां मनाने तक को राजी नहीं हो सके।
बसखारी के बुकिया गांव में वर्ष 2018 में भूमि व अन्य संपत्ति विवाद को लेकर दो भाई सुभाष व फूलचंद में विवाद हो गया था। मारपीट व गाली गलौज होने को लेकर दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर केस दर्ज करा दिया था। इसमें इन दोनों के अलावा परिवार की महिलाएं भी शामिल थीं। वर्षों तक दोनों भाई मुकदमा लड़ते रहे। कोर्ट कचेहरी की दौड़ लगाते रहे। अब इससे बचने के लिए शनिवार को जिला कोर्ट पहुंचकर दोनों भाइयों ने सुलह समझौते से मामला खत्म कर दिया। हालांकि इसी बीच इस मामले की जानकारी लेने मीडियाकर्मी पहुंचे तो दोनों ही भाइयों के बीच कोई सामंजस्य या खुशी नहीं दिख सकी। दोनों भाइयों व उनके परिजनों के साथ खड़े होकर खुशी मनाने को कहा गया लेकिन तब भी वह ऐसा करने को तैयार नहीं हुए। दोनों भाइयों ने वहीं पर अलग-अलग फोटो खिंचाई, लेकिन गले मिलने के लिए आगे नहीं आ सके। (संवाद)
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धीरज के चेहरे पर बिखरी खुशी
अंबेडकरनगर। राष्ट्रीय लोक अदालत ने शनिवार को अकबरपुर तहसील के नेनुआ गांव निवासी धीरज के चेहरे पर खुशियां बिखेर दीं। धीरज ने बताया कि उनके पिता देवेंद्र प्रताप ने दस वर्ष पहले केसीसी से एक लाख 77 हजार रुपये का ऋण लिया था। बाद में उनका निधन हो गया। यह ऋण ब्याज सहित बढ़कर तीन लाख 64 हजार हो गया था। बैंक कर्मी तबसे लगातार वसूली के लिए दबाव बना रहे थे। धीरज ने एलडीएम कमलेश भाष्कर से बीते दिनों संपर्क साधा। इसके बाद अब 90 हजार रुपये में एक मुश्त समाधान कर धीरज को ऋण से मुक्ति दे दी गई। (संवाद)