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राम भरत मिलाप प्रसंग का हुआ मंचन

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अंबेडकरनगर। श्रीचंद्रलोक रामलीला समिति के कलाकारों ने शनिवार रात राम-भरत मिलाप प्रसंग का मंचन किया। सीता हरण का भी मंचन कलाकारों ने किया। कलाकारों ने दिखाया कि पहले प्रसंग में भरत भगवान राम को वन से अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट रवाना होते हैं। जब लक्ष्मण को भरत के आगमन का पता चलता है तो वह क्रोधित हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि शायद भरत युद्घ के लिए यहां आ रहे हैं।
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तब लक्ष्मण के क्रोध को देखकर प्रभु राम कहते हैं कि भरत ऐसा कभी नहीं कर सकता। उसके जैसे भाई बिरले ही मिलते हैं। किसी के प्रयोजन के बारे में जाने बगैर स्वयं निर्णय ले लेना कतई उचित नहीं है। वन पहुंचने पर भरत जैसे ही प्रभु राम को देखते हैं, दौड़कर उनके चरणों से लिपट जाते हैं और माता कैकेयी की धृष्टता को क्षमा करने, अयोध्या लौटने की याचना करते हैं।
प्रभु राम कहते हैं कि भरत एक पुत्र का नैतिक कर्तव्य यह है कि वह अपने माता पिता की आज्ञा का पालन करे। इसके लिए चाहे पुत्र को अपने प्राणों का न्यौछावर ही क्यों न करना पड़े। प्रतिकूल परिस्थितियों में जो अपने धैर्य व संस्कारों को बनाए रखता है, सच्चे मायने में वह पुरुषार्थी होता है। प्रभु राम के समझाने पर भरत उनकी खड़ाऊं लेकर अयोध्या लौट जाते हैं। बाद में सीता हरण प्रसंग का भी मंचन कलाकारों ने किया।
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