अंबेडकरनगर। जिले में शनिवार को जगह-जगह सात मोहर्रम का जुलूस पूरे शानो-शौकत के साथ निकला। अंजुमन के सदस्यों ने जहां इस दौरान नौहाख्वानी व सीनाजनी की, तो वहीं उलमा ने कर्बला के शहीदों पर रोशनी डालकर माहौल को गमगीन बना दिया। उधर, शनिवार को पूरे दिन मजलिसों का सिलसिला भी चलता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भागीदारी की।
जिला मुख्यालय पर दोपहर बाद अकबरपुर नगर के जौहरडीह से ढोल नगाड़ों के बीच अलम व दुलदुल का जुलूस मुरादाबाद होता हुआ पेवाड़ा स्थित पक्के चौक पर पहुंचा। कुछ ही देर बाद अंजुमन अकबरिया रजिस्टर्ड के तत्वावधान में भी अलम, ताबूत व दुलदुल का जुलूस विभिन्न रास्तों से होता हुआ पक्के चौक पर पहुंच गया। दोनों जुलूसों के मिलान के बाद दोनों एक साथ नौहाख्वानी व सीनाजनी करते हुए आगे बढ़े।
पुराने तहसील चौराहे के निकट जुलूस अकबरपुर अयोध्या मार्ग होता हुआ मकजब जाफरिया पहुंचा, जहां आयोजित मजलिस को मौलाना अकबर अली वॉयज ने संबोधित किया। कहा कि सात मोहर्रम से इमाम हुसैन के खेमे में पानी पूरी तरह से समाप्त हो गया था। छोटे-छोटे बच्चे कर्बला की जलती जमीन पर प्यास से बेहाल थे। 10 मोहर्रम को इमाम हुसैन व उनके 72 साथियों को तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद कर दिया गया।
अंजुमन अध्यक्ष रेहान जैदी व सचिव रजा अनवर ने बताया कि घर-घर जाकर दुलदुल की लोगों को जियारत कराई गई। इसमें बड़ी संख्या में हिंदू धर्म के लोगों ने भी दुलदुल को जलेबी व चना खिलाया। इसी प्रकार सिकंदरपुर में इमामबारगाह से अंजुमन हुसैनिया के तत्वावधान में अलम, ताबूत व दुलदुल का जुलूस निकला।
इससे पहले आयोजित मजलिस में डॉ. अली मेंहदी ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि वे इमाम हुसैन के बताए आदर्शों पर चलकर समाज व देश के उत्थान में योगदान दें। इसके अलावा जलालपुर, टांडा, लोरपुर, सिझौली, खासपुर, दहियावर, हजपुरा, कजपुरा, मछलीगांव समेत जिले के कई अन्य क्षेत्रों में अलम, ताबूत व दुलदुल का जुलूस निकला।