अंबेडकरनगर। 900 करोड़ की ठगी के मामले में केस दर्ज कर पुलिस ने चुप्पी साध ली है। एक तरफ जहां केस दर्ज होने के बाद जांच में कोई प्रगति नहीं हो रही है वहीं केस दर्ज होने से पहले स्वाट टीम की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। खबर है कि नामजद मुख्य आरोपी के भाई की स्वाट टीम के सदस्यों से मुलाकात हुई थी। इसके बाद भी पुलिस खाली हाथ ही है।
नौ सौ करोड़ की ठगी कर जिले के हजारों लोगों को चूना लगा दिया गया। पुलिस का इस पूरे मामले में रुख ठीक नहीं रहा। पहले तो ठगों के सक्रिय रहने के बाद भी केस नहीं दर्ज हुआ। सोशल मीडिया पर मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया। मामले की फौरी जांच स्वाट टीम को सौंप दी गई। स्वाट टीम ने जांच शुरू की तो मामले के खुलासे व आरोपियों की धरपकड़ के बजाय दिशा कहीं और केंद्रित हो गई। इसमें एक साहब व दो सफेदपोश की भूमिका भी काफी असरदार बताई जाती है।
लोगों का कहना है कि इसी के चलते ही स्वाट टीम ने आरोपियों को पकड़ने पर ध्यान नहीं दिया। खबर है कि मामले के एक मुख्य नामजद आरोपी के भाई की तीसरे व्यक्ति के माध्यम से स्वाट टीम से मुलाकात कराई गई। आमतौर पर तमाम गंभीर मामलों में आरोपियों के परिजनों को कई कई दिन तक बैठाए रखा जाता है। आरोपी आत्मसमर्पण कर दे यह कोशिश की जाती है। इससे इतर यहां खबर यह है कि मुख्य आरोपी के भाई से गुपचुप वार्ता के बाद उसे जाने दिया गया। इसके चलते ही पुलिस की भूमिका पर सवाल नए सिरे से खड़े होने लगे हैं।
नहीं बढ़ सकी जांच की रफ्तार
केस दर्ज होने के बाद से अकबरपुर कोतवाली पुलिस जांच की रफ्तार नहीं बढ़ा सकी है। छह आरोपियों पर तो केस दर्ज कर लिया गया लेकिन उन्हें पकड़ने के लिए न दबिश दी गई न ही अन्य कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोगों का कहना है कि जांच की दिशा बढ़ी होती तो नामजद आधा दर्जन लोगों से इतर कई अन्य शातिर भी कार्रवाई के दायरे में आ चुके होते।
चल रही विवेचना
मामले में विवेचना की जा रही है। पूरी गंभीरता व जिम्मेदारी के साथ विवेचना आगे बढ़ाई जाएगी। वादी व अन्य लोगों से जरूरी जानकारी ली जा रही है। - संजय राय, एएसपी