अंबेडकरनगर। कोरोना संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए निशुल्क उपलब्ध करायी जा रही बूस्टर डोज (एहतियाती खुराक) को लेने से लोग गुरेज बरत रहे हैं। वैक्सीनेशन के विशेष अभियान को सफल बनाने के लिए जागरूकता की प्रचार प्रसार के तमाम दावे के बावजूद जिले में 15 लाख के तय लक्ष्य के सापेक्ष अब तक सिर्फ 3.69 लाख को ही टीके की बूस्टर डोज लगायी जा सकी है, जो लक्ष्य का मात्र 24 फीसदी है। अब टीका लगवाने के तय लक्ष्य को 30 सितंबर तक कैसे पूरा किया जाए इसकी सिरदर्दी जिम्मेदारों को परेशान कर रही है।
कोरोना से बचने की वैक्सीन की पहली व दूसरी डोज ले चुके 18 वर्ष की आयु से अधिक उम्र के लोगों को सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क प्री कॉशन डोज लगवाने की सुविधा शुरू की गयी थी। इसके लिए 30 सितंबर तक जिले में 15,12,956 लोगों को विशेष वैक्सीन डोज देने का लक्ष्य तय किया गया था। 15 जुलाई से शुरू हुए इस अभियान में डेढ़ माह से अधिक का समय बीत जोन के बाद भी विभागीय अधिकारी लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 24 फीसदी लोगों को ही वैक्सीन की विशेष डोज लगवा सके हैं। इसके लिए सीएचसी, पीएचसी के अलावा गांव गांव शिविर लगाकर लोगों को बूस्टर डोज दिए जाने का कार्य करने के बावजूद आम लोगों की उदासीनता पूरे अभियान की सफलता पर प्रश्न चिन्ह लगा रही है। अभियान की जागरूकता के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों के बावजूद प्रि-कॉशन डोज अभियान गति नहीं पकड़ पा रहा है।
बूथों पर नहीं पहुंच रहे लोग
अभियान से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि वैक्सीन की प्रथम व दूसरी डोज लेने का जो उत्साह व जागरूकता लोगों में थी वह इस विशेष बूस्टर डोज को लेकर पूरी तरह से गायब है। वैक्सीन की प्रथम व दूसरी डोज लेने के लिए ऑन लाइन प्रक्रिया में कुछ समय भी लगता था। इसके बाद भी लोग इंतजार कर टीका लगवाकर ही जाते थे। अब प्री-कॉशन डोज में किसी भी प्रकार का इंतजार नहीं करना पड़ रहा है, सिर्फ पुराने रिकार्ड के आधार पर ही वैक्सीन की डोज देने के बावजूद लोग अभियान के प्रति पूरी तरह उदासीन बने हैं।
शिविर आयोजित कर लोगों को किया जा रहा जागरूक
प्री-कॉशन डोज दिए जाने का कार्य जिले में शिविर आयोजित करके किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग डेढ़ सौ से अधिक बूथों पर, जबकि रविवार को ढाई सौ से अधिक बूथों पर वैक्सीन की विशेष डोज देने की व्यवस्था रहती है। अभियान की सफलता के लिए लोगों को और जागरूक बनाया जाएगा। -डॉ. रामानंद सिद्धार्थ, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी