अंबेडकरनगर। यदि आपने फरवरी 2009 में या इसके बाद भवन बनवाया है तो आपको एक प्रतिशत उपकर (सेस) श्रम विभाग में जमा करना होगा। 10 लाख रुपये तक लागत वाले घरों को इस दायरे में नहीं रखा गया है जिले में संबंधित भवन स्वामियोंं को चिह्नित कर नोटिस दिया जा रहा है।
श्रम विभाग जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम (जीआईएस) से मैपिंग करा कर भवनों की स्थिति का पता लगाएगा और क्रमवार नोटिस जारी करेगा। नगर पालिका अकरबपुर में 20 हजार से अधिक भवन हैं। मौजूदा समय में नगर में निर्माण कराने के लिए निकाय और ग्रामीण क्षेत्र में जिला पंचायत से नक्शा पास कराना होता है। इसके लिए शुल्क जमा कराया जाता है। श्रम विभाग के अनुसार, भवन एवं सन्निर्माण कर्मकार अधिनियम के तहत एक प्रतिशत सेस लेने का प्रावधान किया गया है।
विलंब पर दो प्रतिशत प्रति माह लगेगा ब्याज
विभाग के अनुसार, भवन मालिकों को जारी नोटिस में सेस चुकाने की समय सीमा तय की गई है। इस अवधि तक सेस का भुगतान न करने पर भवन मालिक को सेस की रकम का दो प्रतिशत ब्याज प्रत्येक माह के हिसाब से देना पड़ेगा। यदि निर्माण फरवरी 2009 से पहले हुआ है और नोटिस आ गया है तो गृह व जलकर के साथ बिजली का बिल आदि प्रस्तुत किया जा सकता है।
ऐसे तय होती है लागत
मकान की लागत कवर्ड एरिया के आधार पर तय की जाती है। इसके अलावा लोनिवि, नगर निकाय और राजकीय निर्माण निगम जैसी सरकारी एजेंसियां हर साल प्रति स्क्वायर फुट के हिसाब से लागत तय करती हैं। इन एजेंसियों के न्यूनतम रेट के आधार पर ही मकान की लागत तय की जाएगी।
श्रमिकों पर खर्च की जाएगी राशि
इस वित्तीय वर्ष में उपकर जमा करने का 29 करोड़ का लक्ष्य मिला है। इस धनराशि को श्रमिकों के लिए 15 से अधिक कल्याणकारी योजनाओं के संचालन पर खर्च किया जाएगा। - राजबहादुर यादव, डिप्टी कमिशनर श्रम विभाग