अंबेडकरनगर। ओवरलोड ट्रांसफाॅर्मरों ने जिले की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को बेपटरी कर दिया है। बीते अप्रैल माह से अब तक कुल 887 ट्रांसफाॅर्मर फुंक गए। नतीजा यह रहा कि अलग-अलग समय पर संबंधित क्षेत्र के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। एक बड़ी दिक्कत यह भी है कि 24 घंटे में ट्रांसफाॅर्मर को बदल देने संबंधी शासन के कड़े निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
गर्मी शुरू होते ही शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों के बिजली ट्रांसफॉर्मरों के जवाब देने का जो सिलसिला शुरू हुआ था वह अब तक जारी है। क्योंकि ज्यादातर ट्रांसफाॅर्मर ओवरलोडेड हैं। लंबे समय से ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता बढ़ाए जाने की मांग चली आ रही है। कई स्तरों पर प्रस्ताव भी लंबित हैं इनकों मंजूरी नहीं मिल पा रही। नतीजा यह है कि ट्रांसफाॅर्मर आए दिन फुंक रहे हैं। अकबरपुर नगर के पीडब्लूडी के निकट लगा ट्रांसफॉर्मर मंगलवार शाम को जवाब दे गया।
जिला मुख्यालय का मामला होने के बावजूद ट्रांसफाॅर्मर को बदलने में 24 घंटे से अधिक का समय लग गया। नतीजा यह हुआ कि स्थानीय आबादी को पेयजल समेत कई अन्य तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शहरी क्षेत्रों से इतर ग्रामीण क्षेत्रों की हालत ज्यादा खराब है। वहां ट्रांसफाॅर्मर लगातार जल रहे हैं तो वहीं उन्हें बदलने की सुध भी जल्दी नहीं हो पा रही। ट्रांसफॉर्मर बदले जाने में दो से तीन चार दिन का समय लग रहा है।
ट्रांसफाॅर्मरों पर लोड इस कदर है कि अप्रैल माह से अब तक 887 ट्रांसफाॅर्मर जल गए। इसमें अप्रैल माह में 125 तो मई माह में 215 ट्रांसफाॅर्मर फुंके। जून माह में और ज्यादा ट्रांसफाॅर्मर जल गए। कुल 310 ट्रांसफार्मरों ने उपभोक्ताओं का साथ छोड़ दिया। 25 जुलाई को 239 ट्रांसफाॅर्मर जल गए। ट्रांसफाॅर्मरों में सबसे ज्यादा 25 केवी के 101 ट्रांसफाॅर्मर जले। जबकि 63 केवी के 145 तथा 10 केवी के 40 ट्रांसफाॅर्मर जले।
ट्रांसफाॅर्मरों की गुणवत्ता पर सवाल
लगातार जल रहे ट्रांसफाॅर्मरों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र जायसवाल व पीयूष सेठ ने कहा कि ट्रांसफार्मरों की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। जिस संस्था से ट्रांसफाॅर्मर की आपूर्ति हो रही है, वहां निर्माण के साथ ही आपूर्ति के बाद की स्थिति की भी जांच कराई जाए। अधिवक्ता विशाल सिंह ने कहा कि प्रत्येक ट्रांसफॉर्मर पर एलटी फ्यूज बॉक्स लगाए जाने की जरूरत है। ऐसा होने पर ट्रांसफाॅर्मरों को ज्यादा सुरक्षित रखा जा सकता है। इस पर विभाग ध्यान नहीं दे रहा है क्योंकि मरम्मत के नाम पर होने वाला खेल तब नहीं हो सकेगा।
बढ़ाई जा रही क्षमता
जिले में ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता बढ़ाने का काम क्रमबद्ध ढंग से चल रहा है। इससे काफी सुधार आया है। जल्द ही अन्य ट्रांसफाॅर्मरों की क्षमता भी क्रमवार ढंग से बढ़ाई जाएगी। बिगड़े हुए ट्रांसफार्मर प्राथमिकता पर बदलवाए जा रहे हैं। - अंबा प्रसाद वशिष्ठ, अधीक्षण अभियंता