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या हुसैन की सदाओं के बीच निकला ताबूत का जुलूस

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अंबेडकरनगर। या हुसैन की सदाओं के बीच गुरुवार को सिझौली में गुरुवार को 18 बनी हाशिम के ताबूत का जुलूस निकला। स्थानीय व बाहरी अंजुमन के सदस्यों ने जहां नौहाख्वानी व सीनाजनी की, तो वहीं उलेमा ने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया। जुलूस में मौजूद जहां अलम, ताबूत, दुलदुल व अमारी की जियारत के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे, तो वहीं 72 फिट ऊंचे अलम की जियारत बढ़-चढ़कर हुई। इस बीच किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए सुरक्षा के भी कड़े प्रबंध किए गए थे।
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जुलूस की शुरुआत इमामबारगाह कमरे बनी हाशिम से मौलाना सै. शारिब की मजलिस से हुई। कहा कि कर्बला में इमाम हुसैन व उनके साथियों की शहादत को बलपूर्वक दबा दिया गया होता, यदि इमाम हुसैन की बहन जैनब न होतीं। जैनब ने कर्बला से सीरिया तक जगह जगह लोगों को कर्बला के शहीदों के बारे में बताया।
इसके बाद लोगों को जानकारी हो सकी कि वक्त के बादशाह यजीद ने कितना अधिक जुल्म आखिरी रसूल मोहम्मद मुस्तफा अलैह के नवासे पर ढाया है। इसी का नतीजा है कि 1400 से अधिक वर्ष बीत चुके हैं कर्बला में इमाम हुसैन को शहादत दिए हुए, लेकिन समूची दुनिया में सभी मजहब के लोग उन पर आंसू बहाते हैं।
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उधर बाद में निकला जुलूस विभिन्न रास्तों से होता हुआ रौजए अली अकबर पहुंचकर संपन्न हुआ। आयोजन समिति से जुड़े अब्बास रिजवी, इमरान, आसिफ, साजिद अली, कौसर, अल्तमस ने बताया कि जुलूस के दौरान अंजुमन मजलूमिया हरदोई, अंजुमन हैदरिया अब्दुल्लापुर, अंजुमन गुलशने इस्लाम आजमगढ़, अंजुमन पंजतनी सुल्तानपुर, अंजुमन जाफरिया जलालपुर, अंजुमन गुंचे नासीरुल अजा जौनपुर के सदस्यों ने जहां नौहाख्वानी व सीनाजनी की, तो वहीं मौलाना नदीम रजा, मौलाना बाकर काजमी मुजफ्फरनगर, मौलाना शब्बीर वारसी कोलकाता ने जगह जगह तकरीर कर माहौल को भावुक बना दिया।
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