अंबेडकरनगर। धान खरीद में जिला गत वर्ष से पीछे रह गया। इस बार 86.24 प्रतिशत ही धान की खरीद हुई जबकि गत वर्ष 93 प्रतिशत हुई थी। 28 फरवरी को जब खरीद बंद हुई तो लक्ष्य की तुलना में लगभग 21 हजार एमटी की खरीदारी कम हुई। लक्ष्य मिला था 1,55,000 एमटी का लेकिन सिर्फ 1,33,676.85 एमटी धान ही खरीदा गया।
धान खरीद के शुरुआती दौर में मोटे धान की खरीद के लिए संबंधित किसानों से पक्की जीएसटी बिल की मांग की जा रही थी। इसके चलते किसानों को मुश्किलें उठानी पड़ी थीं। हालांकि बाद में इसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी गई। इसके बाद भी ज्यादातर क्रय केंद्रों पर प्रभारियों की मनमानी का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।
समय पर खरीद न होने से कई कई दिनों तक किसान धान बेचने के लिए क्रय केंद्र पर लाइन लगाने को मजबूर होते रहे। एक मुसीबत यह भी कि समय से पहले ही ज्यादातर एजेंसियों के क्रय केंद्र बंद हो गए थे। इसका खामियाजा यह कि धान की खरीद लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।
गौरतलब है कि जिले को 1,55,000 एमटी का लक्ष्य मिला था। पांच एजेंसी के 75 क्रय केंद्र पर खरीदारी हुई थी। 28 फरवरी को जब खरीद बंद हुई तो 30,353 किसानों के 1,33,676.85 एमटी धान की खरीद हो सकी थी जो कि लक्ष्य की तुलना में 86.24 प्रतिशत था। ऐसे में लक्ष्य से लगभग 21 हजार एमटी धान की खरीद कम की गई। गत वर्ष इससे अधिक 93 प्रतिशत धान की खरीद हुई थी। गत वर्ष 1,58,000 एमटी धान खरीद का लक्ष्य था।
धान खरीद के साथ-साथ भुगतान में भी लापरवाही बरती जा रही है। अभी भी करीब दो हजार किसानों का लगभग नौ करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो सका है खाद्य एवं विपणन अधिकारी कार्यालय के अनुसार आठ करोड़ 99 लाख 39 हजार रुपये का भुगतान होना अभी बाकी है।
इसमें आठ करोड़ पांच लाख 99 हजार रुपये का भुगतान अकेले पीसीएफ को ही करना है। इनके अलावा 84 लाख खाद्य विभाग, आठ लाख यूपीएसएस व 44,900 रुपये का भुगतान मंडी समिति को करने हैं।
जिन किसानों का भुगतान अभी नहीं हुआ है, उनका भुगतान शीघ्र ही हो जाएगा। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है।
-सुशील कुमार, पीसीएफ प्रबंधक