अंबेडकरनगर। जनपद का गठन हुए ढाई दशक से अधिक का समय बीत चुका है लेकिन अब तक जिला अस्पताल में कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है। लंबे समय से इस पद की जिम्मेदारी एमडी मेडिसिन संभाल रहे हैं। यहां मात्र ईसीजी व कोलेस्ट्रॉल सीरम की ही जांच की सुविधा है।
25 सितंबर 1995 को अंबेडकरनगर जनपद का गठन तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने किया था। मरीजों के बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल की स्थापना भी कर दी गई। हालांकि अब तक जिला अस्पताल में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। ढाई दशक बाद भी कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी है।
मौजूदा समय में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इसमें सांस फूलने की बीमारी तेजी से फैल रही है। प्रतिदिन जिला अस्पताल में सांस फूलने से पीड़ित मरीज पहुंच रहे हैं तो औसतन पांच मरीज हृदय की गंभीर बीमारी से त्रस्त होकर आते हैं।
सांस फूलने से पीड़ित मरीजों का तो एमडी मेडिसिन डॉ. डीपी वर्मा, डॉ. मनोज शुक्ला या फिर डॉ. योगश वर्मा इलाज कर देते हैं लेकिन गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है।
और तो और जांच की भी समुचित व्यवस्था जिला अस्पताल में नहीं है। यहां मात्र ईसीजी व कोलेस्ट्रॉल सीरम की ही जांच की सुविधा है। एंजियोग्रॉफी, इको जैसी महत्वपूर्ण जांच की सुविधा भी नहीं है। इसके चलते मरीजों को प्राइवेट पौथोलॉजी पर जांच कराने को मजबूर होना पड़ता है।
हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित धतुरहा कादीपुर सुल्तानपुर निवासी इसराजी गुरुवार को परिवार के साथ जिला अस्पताल पहुंची थीं। उनके पति श्यामलाल ने कहा कि बड़ी उम्मीद से यहां आए थे लेकिन कॉर्डियोलॉजिस्ट के न होने तथा बेहतर जांच की सुविधा न होने के चलते लखनऊ रेफर कर दिया गया।
इससे कड़ाके की ठंड में समस्याओं का सामना करना पड़ा। यदि सही स्थिति मालूम होती तो घर से सीधे लखनऊ ही चले जाते। जिम्मेदारों को समुचित व्यवस्था करनी चाहिए।
तहसील क्षेत्र टांडा के किछौछा निवासी मेवाती देवी को सांस फूलने की समस्या है। परिवार के सदस्य उन्हें लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। यहां ईसीजी तो हुई लेकिन अन्य किसी पकार की जांच नहीं हो पाई। मेवाती ने कहा कि इको की जांच करानी है।
यह सुविधा जिला अस्पताल में नहीं है। ऐसे में अब प्राइवेट पौथोलॉजी का सहारा लेना पड़ेगा। जिला अस्पताल में सभी प्रकार की प्रमुख जांचों की सुविधा कराई जानी चाहिए।
कॉर्डियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए कई बार शासन को पत्र भेजा जा चुका है। इसके अलावा प्रमुख जांच की सुविधा भी उपलब्ध कराने के लिए अलग से पत्र भेजा गया है।
-डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस