अंबेडकरनगर। करीब 13 वर्ष पहले दहेज के लिए महिला की हत्या करने के आरोपी पति व जेठानी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय विजय कुमार डूंगराकोटि ने साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त कर दिया। इससे पहले इन दोनों को इसी मामले में जेल जाना पड़ा था।
वर्ष 2009 में सुल्तानपुर जनपद के दोस्तपुर थाना क्षेत्र के बहोरापुर गांव निवासी ने अकबरपुर कोतवाली में दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
बताया था कि उसने अपनी पुत्री मीरा सिंह का विवाह 1998 में चनईपुर निवासी सूर्यनरायण सिंह उर्फ मुन्ना के साथ की थी। दहेज के लिए उसकी पुत्री को अक्सर प्रताड़ित किया जाता था।
18 जनवरी 2009 को उसकी पुत्री की जहर खिलाकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने मामले में तहरीर के आधार पर पति सहित अन्य ससुरालीजनों पर केस दर्ज किया था।
विवेचना के दौरान देवर सहित अन्य आरोपी घटना में शामिल नहीं मिले। पुलिस ने पति सूर्यनरायण व जेठानी कुमकुम सिंह के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। दोनों को जेल जाने के बाद कोर्ट से जमानत मिली थी।
अब सत्र परीक्षण के दौरान अभियोजन पक्ष मृतका की हत्या साबित नहीं कर सका। न्यायालय ने पाया कि साक्ष्यों से निष्कर्ष निकलता है कि मृतका ने स्वयं कोई जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी।
अभियोजन यह भी साबित करने में असफल रहा कि आरोपियों द्वारा मृतका को आत्महत्या के लिए उकसाया गया। बचाव पक्ष की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता नरसिंह नारायण सिंह ने न्यायालय के समक्ष ठोस दलीलें व तर्क से साबित किया कि आरोपी पर आरोप साबित नहीं होते हैं। उन्हें साजिशन फंसा दिया गया।
न्यायाधीश ने सुनवाई के बाद दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।