अंबेडकरनगर। आग से निपटने को लेकर जिला अस्पताल में पूरी तरह से बेफिक्री का माहौल है। आग बुझाने के लिए लगभग एक दशक पहले स्थापित एक दर्जन से अधिक फायर हाइड्रेंट देखरेख के अभाव में एक एक-कर खराब होते चले गए। अब सभी खराब पड़े हैं।
गर्मी में आग की वारदातों में वृद्धि होने की आशंका रहती है। इसे देखते हुए भी अस्पतालों में जरूरी प्रबंध नहीं हो पा रहे। बीते दिनों दिए गए प्रधानमंत्री के निर्देशों के बावजूद जिला अस्पताल में आग से निपटने को लेकर लापरवाही का माहौल है।
लगभग 10 वर्ष पहले जिला अस्पताल में आग से निपटने के लिए एक दर्जन से अधिक फायर हाइड्रेंट लगाए गए। स्थापना के बाद से ही देखरेख बेहतर ढंग से नहीं की गई। नतीजा यह रहा कि एक-एक कर सभी फायर हाइड्रेंट खराब हो गए।
लगभग दो वर्ष से सभी हाइड्रेंट खराब हैं लेकिन इन्हें दुरुस्त कराने को लेकर जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं। इससे प्रतिदिन जिला अस्पताल जाने वाले मरीज व तीमारदारों की जान जोखिम में बनी रहती है।
आग से निपटने के लिए जिला अस्पताल में सिर्फ वैकल्पिक प्रबंध ही हैं। जर्जर हो चुकी बालू भरी बाल्टियां तो हैं लेकिन अक्सर उसकी साफ-सफाई नहीं होती। कभी-कभी तो तीमारदार उसे पीकदान के रूप में प्रयोग करने लगते हैं। इसके अलावा 55 छोटे अग्निशामक सिलेंडर लगाए गए हैं। लोगों का मानना है कि यदि आग की बड़ी घटना होती है तो ये यंत्र आग पर काबू पाने में नाकाफी होंगे।
चनवा निवासी इंद्रजीत वार्ड दो में भर्ती रिश्तेदार से मिलने के लिए आए थे। कहा कि जिला अस्पताल में जगह-जगह खराब पड़े फायर हाइड्रेंट को जल्द दुरुस्त कराया जाना चाहिए। यदि परिसर में आग लगती है तो आखिर उससे किस प्रकार से निपटा जाएगा। तीमारदार तो आग से बचने के लिए भाग सकते हैं लेकिन जो गंभीर मरीज हैं वे कहां और कैसे बचेंगे। जिम्मेदारों को गंभीरता दिखानी चाहिए।
जिला अस्पताल में आए तीमारदार रुपईडीहा निवासी लक्ष्मण ने कहा कि आग से निपटने को लेकर इस प्रकार की लापरवाही कतई उचित नहीं है। यदि किसी प्रकार की अनहोनी होती है तो उससे निपटने के लिए जिला अस्पताल में समुचित व्यवस्था नहीं है। जिम्मेदारों को चाहिए कि मरीजों व तीमारदारों के हित को देखते हुए ठोस कदम उठाया जाए।
खराब पड़े फायर हाइड्रेंट को बदलवाने के लिए दो वर्ष से शासन को पत्र भेजा जा रहा था। अब सफलता मिली है। बीते दिनों ही लखनऊ से तकनीकी टीम आई थी। सर्वे किया है। शीघ्र ही नए अत्याधुनिक फायर हाइड्रेंट लगाए जाएंगे।
-डॉ. ओमप्रकाश, सीएमएस