हंसवर (अंबेडकरनगर)। क्षेत्र के तुरसमपुर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन शनिवार को प्रवाचक अंकुल शास्त्री ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव का घमंड तोड़कर गोकुल वासियों की रक्षा की। प्राचीन कथा के अनुसार, द्वापर युग में भगवान इंद्र देव अपनी पूजा न किए जाने से नाराज हो गए थे। इस पर उन्होंने सात दिनों तक लगातार बारिश की। इस बारिश से सभी गोकुलवासियों के प्राण संकट में आ गए। गोकुल वासियों के प्राणों को बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गिरिराज पर्वत को अपने हाथ की सबसे छोटी अंगुली पर उठा लिया था। सभी गोकुल वासी पर्वत के नीचे आ गए। इसके बाद इंद्र देव को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्हें ज्ञात हुआ कि भगवान श्रीकृष्ण कोई साधारण नर नहीं स्वयं नारायण का स्वरूप हैं। उसके बाद भगवान कृष्ण के समक्ष पहुंचकर अपने अपराध के लिए क्षमा याचना की। इस दौरान पूरा परिसर जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजता रहा।