अंबेडकरनगर। लगभग डेढ़ दशक पहले जैतपुर थाना क्षेत्र में आठ वर्षीय बालक प्रवीण की हत्या के दोषी सुनील को अपर जनपद न्यायाधीश तृतीय नेहा आनंद ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। घटना को छिपाने के आरोप में पांच वर्ष की सजा के साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
गोपरी चांदपुर के प्रधान पति डॉ. रामहित यादव ने 21 मई 2004 को जैतपुर थाने में तहरीर देकर बताया था कि गांव के बाहर मक्के के खेत में गांव निवासी नंदलाल के लगभग आठ वर्षीय पुत्र प्रवीण का शव पड़ा है। पुलिस ने छानबीन शुरू की तो पता चला कि गांव निवासी सुनील गुप्त घटना से पहले वाली रात को प्रवीण को अपने साथ वीसीआर दिखाने के बहाने ले गया था।
प्रवीण की मां ने पुलिस को बताया कि सुनील ने जब प्रवीण को साथ ले जाने के लिए कहा तो वह तैयार नहीं था। इस पर प्रवीण की मां और सुनील की मां ने भी मना किया लेकिन सुनील जबरन प्रवीण को उठाकर साथ ले गया। देर रात तक प्रवीण वापस नहीं आया तो सुनील ने बताया कि वह तो आधे रास्ते से ही लौट गया था। अगले दिन सुबह शव मिलने पर कोहराम मच गया।
पुलिस ने विवेचना में सुनील का नाम शामिल कर उसे जेल भेज दिया था। यह मामला अब सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश कुमार शुक्ल ने बताया कि अपर जनपद न्यायाधीश तृतीय नेहा आनंद ने आरोपी सुनील कुमार को बालक की हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
घटना को छिपाने के आरोप में पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए उस पर 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।