अंबेडकरनगर। धनाभाव के चलते 902 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत पक्का काम लगभग पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है। गांवों में लगभग साढ़े 40 करोड़ रुपये के पक्के काम की तुलना में करीब साढ़े 17 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं हो सका है। इससे ग्राम प्रधानों को मुश्किलें उठानी पड़ रही हैं।
ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। आवागमन संकट व जलभराव की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसके पीछे का मुख्य कारण धनाभाव है। पक्के काम के लिए शासन से धन की उपलब्धता न होने से मनरेगा के तहत कराए जाने वाले पक्के काम लगभग पूरी तरह से ठप हैं।
मनरेगा उपायुक्त कार्यालय के अनुसार जिले में मनरेगा के तहत 902 ग्राम पंचायतों में 40 करोड़ 50 लाख 49 हजार रुपये का काम 2022-23 में हुआ है। इसकी तुलना में अब तक 17 करोड़ 45 लख नौ हजार रुपये का भुगतान नहीं हो सका है।
भुगतान के लिए ग्राम प्रधान जिम्मेदारों से लगातार शिकायत दर्ज करा रहे हैं लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा है। नतीजतन निर्माण सामग्रियों के विक्रेताओं ने अब उधार देने से हाथ खड़ा कर लिया है।
विकास खंड अकबरपुर के अंधियरवा के ग्राम प्रधान वेदप्रकाश वर्मा ने बताया कि ढाई लाख रुपये से अधिक का बकाया है। अब तो दुकानदार ने भी उधर सामग्री देना बंद कर दिया है। इससे पक्का काम लगभग पूरी तरह से ठप हो गया है।
कटरिया सम्मनपुर के प्रधान संजय राजभर ने बताया कि लगभग एक लाख रुपये का बकाया है। अब जब भुगतान हो जाएगा, तभी पक्का काम भी हो सकेगा। वैसे कच्चे काम सुचारु रूप से हो रहे हैं।
मनरेगा उपायुक्त कार्यालय के अनुसार अकबरपुर विकास खंड में तीन करोड़ 35 लाख 91 हजार, कटेहरी में तीन करोड़ 88 लाख 21 हजार, रामनगर में तीन करोड़ 68 लाख 66 हजार, जलालपुर में एक करोड़ 70 लाख तीन हजार रुपये का बकाया है।
वहीं, जहांगीरगंज में दो करोड़ 15 लाख नौ हजार, भियांव में एक करोड़ 83 लाख 83 हजार, भीटी में एक करोड़ 91 लाख 53 हजार, बसखारी में 58 लाख 18 हजार व टांडा विकास खंड में 33 लाख 38 हजार रुपये का बकाया है।
मनरेगा के तहत गांवों में जो पक्के काम कराए गए हैं, उनका बकाया भुगतान शीघ्र ही किया जाएगा। इस संबंध में बीते दिनों ही शासन को पत्र भेजा गया है।
-राजेंद्र प्रसाद मिश्र, मनरेगा उपायुक्त