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यहां सड़कों पर चलना हो सकता खतरनाक

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अंबेडकरनगर। जिले में सड़कों पर चलना कई जगह जानलेवा बन सकता है। कटेहरी-करमपुर मार्ग जगह-जगह इस तरह धंस गया है कि गहरे गड्ढे बन गए हैं। इस मार्ग पर बड़े वाहनों का आवागमन बंद हो गया है। सड़कों की हालत यहीं तक सीमित नहीं है। दो नेशनल हाईवे भी निर्माण में भ्रष्टाचार व लापरवाही की नजीर बन गए हैं। सबसे बुरी हालत टांडा से अकबरपुर होते हुए सुल्तानपुर व रायबरेली तक जाने वाले मार्ग की है। इसी तरह बस्ती-आजमगढ़ नेशनल हाईवे भी कई जगह क्षतिग्रस्त हो गया है। इन दोनों हाईवे पर आवागमन शुरू हुए अभी पांच वर्ष भी नहीं बीते हैं।
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राज्य सरकार की तरफ से सड़कों को गड्ढामुक्त करने व उनके बेहतर निर्माण को लेकर दिए जाने वाले तमाम दिशा-निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर अधिकारी व कर्मचारी करते नहीं दिख रहे हैं। कार्यदायी संस्थाओं व विभिन्न विभागों की तरफ से बनवाई गई सड़कों में गुणवत्ता की तमाम अनदेखी लगातार सामने आ रही है। ताजा मामला विकास खंड कटेहरी अंतर्गत मड़हा नदी पर सेमरा घाट में बने पुल से होकर करमपुर ग्रामसभा तक जाने वाले पिच मार्ग का है। ग्रामीण अभियंत्रण विभाग की तरफ से एक वर्ष पहले ही इस मार्ग का निर्माण कराया गया था।
ग्रामीणों ने बताया कि कटेहरी से सेमराघाट होते हुए करमपुर तक जाने वाले पिच मार्ग की मरम्मत आरईएस ने बीते दिनों कराई थी। निर्माण कार्य में बरती गई धांधली की पोल अब खुल गई है। सेमराघाट से करमपुर की तरफ बढ़ने पर सड़क कई जगह धंस गई है। सड़क तीन से चार फीट की गहराई व चौड़ाई में धंस गई है। इस मार्ग से बड़े चार पहिया वाहनों का आवागमन ठप पड़ गया है। स्थानीय लोगों को कई किलोमीटर का चक्कर काटकर आवागमन करना पड़ रहा है।
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बाइक व साइकिल सवार इस मार्ग से होकर निकलते तो हैं लेकिन उनमें हमेशा अनहोनी की आशंका बनी रहती है। खासतौर पर रात के समय बड़े गड्ढों के न दिखने से किसी भी समय अनहोनी हो सकती है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले दो दिनों में पांच बाइक व साइकिल सवार यहां गिरकर घायल हो चुके हैं। उधर आरईएस के अवर अभियंता ने बताया कि सेमराघाट पुल के निकट कुछ दूर ही सड़क का निर्माण विभाग ने कराया है। यहां पहले भी सड़क धंस चुकी है। यहां पर बड़े पत्थर डालकर मिट्टी की कटान रोकने तथा नए सिरे से निर्माण की जरूरत है।
इसी मार्ग से होकर मदनगढ़, बनकठवा, सेमराघाट, करमपुर, मोलनापुर व नरहिया आदि गांवों के सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल आते-जाते हैं। ऐसे में मुख्य मार्ग के ही धंस जाने से छात्र-छात्राओं की सुरक्षा का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय धीरेंद्र, रामसूरत यादव व बंटी कहते हैं कि जब तक घर के बच्चे स्कूल से वापस नहीं आ जाते, चिंता लगी रहती है। अभिभावक रतीलाल व उमेश ने कहा कि जिला प्रशासन को इस स्थिति का संज्ञान लेकर अविलंब बेहतर निर्माण तय कराना चाहिए।
जिले से होकर गुजर रहे दो नेशनल हाईवे भी पांच वर्ष के भीतर गड्ढों में तब्दील हो गए। सबसे ज्यादा खराब हालत टांडा से अकबरपुर व सुल्तानपुर होते हुए रायबरेली तक बने नेशनल हाईवे 232 की है। अंबेडकरनगर सीमा में टांडा से महरुआ बाजार तक सड़क हद दर्जे तक क्षतिग्रस्त हो गई है। यही हाल महरुआ से सेमरी बाजार तक है। यह सड़क महरुआ बाजार व उसके आसपास के अलावा पहितीपुर, रतनपुर व गौहन्ना में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है।
गौहन्ना चौराहे से लेकर कटरिया याकूबपुर तिराहे के निकट तक नेशनल हाईवे होने का अहसास ही नहीं हो पाता। कटरिया मोड़ से टांडा तक के पूरे मार्ग पर सुरक्षित चल पाना बड़ी चुनौती है। कुछ ऐसा ही हाल बस्ती से टांडा होते हुए आजमगढ़ तक जाने वाले नेशनल हाईवे 233 का भी है। यह हाईवे भी जगह-जगह निर्माण में धांधली को उजागर करते हुए दिखता है।
दोनों नेशनल हाईवे के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त कराने के लिए पत्र भेजा गया है। करमपुर मार्ग को अविलंब ठीक कराने के निर्देश दिए गए हैं। अन्य मार्गों की भी बेहतर ढंग से मरम्मत हो, इसके लिए जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं।
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-सैमुअल पॉल एन, डीएम
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