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Ambedkar Nagar News: टिकट को लेकर प्रमुख दलों में जोर आजमाइश तेज

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अंबेडकरनगर। आरक्षण सूची के बाद साफ हुई चुनावी तस्वीर के बाद जिले में निकाय चुनाव की सरगर्मी जोर पकड़ने लगी है। चुनावी जंग की तैयारी में जुटे दावेदार अब खुलकर प्रमुख दलों से टिकट पाने की जोड़ तोड़ में जुट गए हैं। सर्वाधिक घमासान भाजपा, सपा व बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ने को लेकर मचा दिख रहा है। कुछ प्रमुख पार्टियों ने तो अपनी जिला इकाई के माध्यम से प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया को भी शुरू कर दिया है।
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आरक्षण घोषित होने से तीन नगर पालिका परिषद व चार नगर पंचायत में करीब तीन दर्जन दावेदार बिना चुनाव लड़े ही बाहर हो गए। इससे अलग अलग सीटों पर अन्य दावेदारों ने राहत महसूस की है। चुनाव मैदान में जमे दावेदार अब जीत हासिल करने के लिए सत्ताधारी भाजपा से लेकर सपा व बसपा का टिकट पाने की जोड़ तोड़ में जुटे हैं।
इसमें सबसे ज्यादा रोचक स्थिति अकबरपुर नगर पालिका परिषद में है। अकबरपुर में मौजूदा अध्यक्ष सरिता गुप्ता एक बार फिर मैदान में हैं। वह भाजपा से टिकट पाने की कोशिश में जुटी हैं। यह सीट अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है।
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इनके साथ ही शहर के वरिष्ठ सराफा व्यवसायी राजकुमार सेठ भी भाजपा का समर्थन पाने की पुरजोर कोशिश में हैं। आरक्षण के चलते भाजपा से टिकट मांग रहे कई दावेदारों के बाहर होने के बाद अब मुकाबला सरिता व राजकुमार के बीच ही दिखने लगा है।
बसपा की तरफ से पूर्व नगर परिषद अध्यक्ष चंद्रप्रकाश वर्मा व श्रावस्ती सांसद रामशिरोमणि वर्मा के भाई रामसुरेश के बीच टिकट को लेकर कड़ा मुकाबला है। टिकट मिलने में फिलहाल पलड़ा रामसुरेश का भारी बताया जाता है। ऐसे में चंद्रप्रकाश के समर्थक उन्हें बतौर निर्दलीय चुनाव लड़ाने की तैयारी में भी जुटे दिख रहे हैं। चंद्रप्रकाश दो बार नगर पालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं।
समाजवादी पार्टी का टिकट पाने को लेकर घमासान तेज है। वर्तमान में अकबरपुर विधानसभा सीट पर भी सपा का कब्जा है। ऐसे में नगर परिषद अध्यक्ष पद पर भी कब्जा करने के लिए सपा पूरी ताकत लगाएगी। पार्टी स्तर से पूर्व जिला महासचिव हाजी अकमल उर्फ जुगून को टिकट की दौड़ में सबसे आगे बताया जा रहा है।
जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी
एक तरफ जहां सभी दावेदार अलग अलग दलों से टिकट पाने की जोर अजमाईश में जुटे दिख रहे हैं वही संबंधित दलों से जुड़े जिम्मेदार फिलहाल चुप्पी साधे हैं। भाजपा व सपा में कई लोग खेमे के अंदर ही अलग अलग दावेदारों का समर्थन कर रह उन्हें टिकट दिलवाने की जोड़तोड़ में जुटे हैं। इनमें से अधिकांश अपना पूरा दमखम दिखाने के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की दौड़ लगाने से भी गुरेज नहीं बरत रहे। इसके लिए दावेदार पार्टी के करीबियों के माध्यम से पार्टी मुख्यालय तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश में जुटे दिख रहे हैं।
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