अंबेडकरनगर। कृषि विभाग पराली जलाने पर सख्ती बरतने की तैयारी में है। किसान पराली जलाते हैं तो कार्रवाई केवल जुर्माना और मुकदमे तक ही सीमित नहीं रहेगी। कृषि विभाग की ओर से विभिन्न योजनाओं में मिलने वाला अनुदान भी नहीं मिलेगा। कोशिश यह है कि इसके जरिए पराली प्रबंधन को और मजबूत किया जा सके।
जिले में इस बार भी करीब 1.14 लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की खेती हुई है। जिले में धान की पैदावार व्यापक पैमाने पर होती है। ऐसे में पराली भी खूब निकलती है। इसका निस्तारण किसानों के लिए परेशानी का कारण बनता है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से लगातार किसानों को जागरूक किया जा रहा है। बावजूद इसके किसान पराली के निस्तारण के लिए उसे आग के हवाले कर देते हैं। इससे प्रदूषण की समस्या गहराती जा रही है। इसे रोकने के लिए जिला प्रशासन की ओर से सभी ब्लॉकों के लिए पुलिस और राजस्व की टीमों का गठन भी किया गया है। इनके द्वारा लगातार पराली प्रबंधन को लेकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
इसके साथ ही जिला प्रशासन ने अब मनमानी करने वाले किसानों को अन्य योजनाओं से वंचित करने का भी निर्णय लिया है। दरअसल, कृषि विभाग पंजीकृत किसानों को गेहूं, धान, सरसों, बाजरा समेत अन्य बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान देता है। इसके साथ ही कृषि रक्षा यंत्रों पर भी अनुदान की व्यवस्था की गई है।इन योजनाओं में किसानों को अनुदान देकर उन्हें सरकार द्वारा राहत दी जाती है, लेकिन अगर किसान पराली जलाएंगे तो उन्हें सभी अनुदान से वंचित कर दिया जाएगा।
इस विधि को अपनाएं
कृषि विभाग का कहना है कि खेतों में पराली का निस्तारण किसानों के लिए बड़ी समस्या नहीं है। हार्वेस्टर से कटी हुई पराली छोटे-छोटे टुकड़ोंं में बट जाती है। इसे खेत में फैलाकर खेत की सिंचाई कर दें। तीन से चार दिन बाद यूरिया का घोल बनाकर इस पर स्प्रे करें। एक सप्ताह बाद खेत की हैरो से जोताई करा दें। पराली को भी खेत में फैलाकर सिंचाई कर कुछ दिन बाद जोताई से निस्तारित किया जा सकता है।
जिले में पराली प्रबंधन और जलाने से रोकने के लिए टीम का गठन किया गया है। सेटेलाइट से निगरानी भी की जाती है। इसके बाद भी यदि पराई को जलाया गया तो केस दर्ज करने के साथ ही कृषि विभाग की योजनाओं से वंचित कर दिया जाएगा। -डॉ. अश्विनी सिंह, उपकृषि निदेशक