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विधिक जागरूकता से ही रुकेगा उत्पीड़न

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अंबेडकरनगर। प्लान ऑफ एक्शन के अनुपालन में बीते दिन जनपद कारागार में प्ली बार्गेनिंग विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन हुआ। जनपद न्यायाधीश पद्मनरायण मिश्र के निर्देश पर आयोजित शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव अंशु शुक्ला ने कई महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
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सचिव ने बताया कि भारतीय संसद ने दंड प्रक्रिया संहिता में संशोधन अधिनियम द्वारा एक नए अध्याय को जोड़ा है, जिसे प्ली बार्गेनिंग शीर्षक दिया गया है। दांडिक अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपसी सामंजस्य से मामले के निपटारे के लिए न्यायालय के अनुमोदन से एक रास्ता निकालते हैं। इसमें अभियुक्त द्वारा अपराध स्वीकारने पर उसे हल्के दंड से दंडित किया जाता है, अन्यथा जो कठोर सजा हो सकती है वह दिया जाता है। इस प्रक्रिया में अभियुक्त पीड़ित पक्ष के हुए नुकसान की भरपाई कर कठोर सजा से बच सकता है।
उन्होंने बताया कि प्ली बार्गेनिंग केवल उन अपराधों पर लागू होता है जिनके लिए कानून में सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। यदि अभियुक्त पर उसी अपराध में पूर्व में दोषी सिद्ध हो चुका हो तो वह इस प्रक्रिया के लिए अयोग्य है। प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन प्राप्त होने पर लोक अभियोजक पीड़ित एवं अनुसंधानकर्ता को न्यायालय में उपस्थित रहने के लिए नोटिस भेजता है। इसके बाद न्यायालय दोनों पक्षों को संतोषजनक हल निकालने का समय देता है।
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सचिव ने बताया कि आम नागरिकों को जागरूक करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा पहली नवंबर से 13 नवंबर तक जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाएगा ताकि आम आदमी विधिक जानकारियां समझकर सका लाभ ले सके। इससे शोषण व उत्पीड़न की घटनाएं भी कम होंगी। जानकारियों के अभाव में कई बार आम नागरिक अपने हक की लड़ाई नहीं लड़ पाता। इस मौके पर कारापाल गिरिजाशंकर यादव, उपकारापाल राजेश कुमार व छोटेलाल सरोज आदि मौजूद रहे।
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