अंबेडकरनगर। जिले में 3.50 करोड़ की लागत से निर्मित हो रही चार पुष्टाहार निर्माण इकाइयों का कार्य जल्द ही पूरा होगा। इससे जहां दो लाख बच्चों व महिलाओं को आसानी से पौष्टिक आहार मिलेगा वहीं स्वयं सहायता समूह की 12 सौ महिलाएं भी रोजगार पाकर स्वावलंबी बन सकेंगी। कटेहरी व जलालपुर में इकाई लगाने का काम अब अपने अंतिम चरण में पहुंचने लगा है।
कुपोषण के खात्मे को चल रही जंग के लिए जिले के 2551 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों, धात्री व गर्भवती को हर माह पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है। इसके तहत पहले पात्रों को पैकेट में दलिया, चावल व तेल निर्धारित मात्रा में उपलब्ध कराया जाता था।
शासन स्तर से हुए बदलाव के बाद अब इस योजना के तहत जिले में चिह्नित 2.05 लाख बच्चों, धात्री व गर्भवती को अब पौष्टिक आहार के बतौर प्री मिक्स लड्डूू के साथ ही नमकीन व मीठी दलिया वितरित किए जाने की तैयारी है। इन पौष्टिक आहारों का निर्माण ब्लॉक मुख्यालय पर ही होना है।
इसके लिए कटेहरी, जलालपुर, अकबरपुर व जहांगीरगंज ब्लॉक मुख्यालय पर पुष्टाहार निर्माण इकाई लगाने का काम चल रहा है। इसकी प्रत्येक इकाई पर करीब 90 लाख का खर्च आएगा। इसमें करीब तीन तीन सौ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का शेयर लग रहा है। पैसा लगाने के साथ ही उत्पादन व आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी महिला समूह ही संभालेंगी।
दो इकाइयों का कार्य अंतिम दौर में
कटेहरी व जलालपुर ब्लॉक मुख्यालय पर पुष्टाहार निर्माण इकाई स्थापना का काम अब अंतिम दौर में है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सब कुछ ठीक रहा तो इस माह के अंत तक इन दोनों ही इकाईयों से पौष्टिक सामग्री के उत्पादन का काम शुरू हो जाएगा। ब्लॉक प्रबंधक कटेहरी प्रमोद कुमार यादव ने बताया कि दोनों ही इकाईयों में मशीन लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है।
भरोसा दिलाया कि इस माह के अंत तक यहां से संबंधित खाद्य सामग्रियों के उत्पादन का काम भी शुरू हो जाएगा। दोनों इकाइयों में कुल चार मशीनों की स्थापना की गई है। कटेहरी में लगने वाली मशीन से कटेहरी व भीटी, जलालपुर में जलालपुर व भियांव, जहांगीरगंज में लगने वाली मशीन से जहांगीरगंज व रामनगर तथा अकबरपुर में लगने वाली मशीन से तीन ब्लॉक अकबरपुर, टांडा व बसखारी को सामग्री की आपूर्ति होगी।
12 हजार महिलाओं को मिलेगा रोजगार
शासन की इस योजना से न सिर्फ पात्र बच्चों, महिलाओं को पौष्टिक आहार मिलेगा, बल्कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ी 12 हजार महिलाएं रोजगार मिलने से स्वावलंबी भी बनेगी। निर्मित हो रही प्रत्येक इकाई से 300-300 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को जोड़ा गया है। प्रत्येक समूह में 10 से 12 महिलाएं रहती हैं। ऐसे में करीब 12 हजार से अधिक महिलाओं को इन इकाईयों का संचालन शुरू होने से रोजगार मिलेगा।