अंबेडकरनगर। धान बेचने पहुंचे किसानों को बुधवार को क्रय केंद्रों से बैरंग लौटना पड़ा। उन्हें बताया गया कि हाइब्रिड धान की खरीद तभी होगी जब वे इसके बीज खरीद का जीएसटी सहित पक्का बिल साथ में उपलब्ध कराएंगे। किसानों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि छह माह पहले का बिल अब अचानक कैसे मिलेगा। अकबरपुर मंडी समिति परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया।
धान खरीद को लेकर लागू किए जा रहे नए-नए नियम किसानों से लेकर राइस मिलरों तक की मुसीबत बढ़ाते हुए दिख रहे हैं। एक तरफ जहां राइसमिलरों को हैसियत प्रमाणपत्र बनवाने में पसीने छूट रहे हैं तो वहीं अब नए नियम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
जिले में अभी हाईब्रिड धान की प्रजाति ही पूरी तरह तैयार हो पाई है। सामान्य किस्म के धान लगभग पखवाड़े भर बाद तैयार हो पाएंगे। धान खरीद के पहले दिन पहली नवंबर को तो सन्नाटे का माहौल रहा लेकिन दूसरे दिन बुधवार को हाईब्रिड धान लेकर किसान क्रय केंद्रों पर पहुंचे तो उन्हें करारा झटका लगा।
किसानों को बताया गया कि हाईब्रिड धान की खरीद तभी होगी जब बीज खरीदने का बिल जीएसटी सहित उपलब्ध कराएंगे। यह सुनते ही किसान सन्न रह गए। किसानों का कहना रहा कि लगभग छह माह पहले जब बेरन तैयार की जा रही थी, तब ऐसी अनिवार्यता की जानकारी नहीं दी थी। इससे उन लोगों ने बिल नहीं लिया था। अब बिल लगाने की अनिवार्यता एकदम अनुचित है।
गौरतलब है कि अकबरपुर मंडी समिति परिसर में सबसे ज्यादा 11 क्रय केंद्र स्थापित हैं। यहीं सबसे ज्यादा किसान पहुंचे। प्रभारियों द्वारा जीएसटी बिल मांगे जाने के चलते धान की खरीद नहीं हो पाई। किसान घंटों वहां डटे रहे लेकिन बात नहीं बनी। नाराज किसानों ने प्रदर्शन करते हुए इस नए नियम को लेकर नाराजगी भी जताई। बुधवार को मंडी समिति से एक दर्जन से अधिक किसान बिना धान बेचे लौट गए। कई अन्य केंद्रों से भी करीब 35 किसान धान लेकर मायूस लौट गए।
रामपुर सकरवारी के प्रशांत वर्मा ने कहा कि धान बेचने के लिए बुधवार भोर ही मंडी पहुंच गए थे। जब बिक्री का समय आया तो प्रभारियों ने नई अनिवार्यता बताई। अब धान लेकर लौटना पड़ रहा है। डल्ला निजामपुर के पवन शुक्ला ने बताया कि दो ट्रॉली धान लेकर मंडी गए थे। बिना बिक्री किए ही वापस जाना पड़ रहा है। ट्रैक्टर-टॉली का किराया भी देना पड़ा। इससे आर्थिक चपत लगी है।
डल्ला निजामपुर के रामअधार व पीरपुर के शिवप्रसाद ने कहा कि वापस लौटना पड़ रहा है। एक तो बिक्री नहीं हुई, दूसरे ट्रैक्टर-ट्रॉली का किराया भी अनायास ही देना पड़ा। किसान अर्जुन ने बताया कि जब बीज की खरीदारी हो रही थी तो उस समय ऐसी अनिवार्यता की जानकारी नहीं दी गई। अब जब धान खरीद शुरू हुई तो ऐसे में नया नियम लागू किए जाने से समस्या खड़ी हो गई है।
सचिन, राजेश, श्यामजी, सौरभ व दिनेश आदि ने कहा कि आखिर किसानों के साथ ही ऐसा क्यों होता है। पहले मौसम की मार ने परेशान किया और अब धान बेचने में दिक्कत हो रही है।
मंडी समिति पर खरीद न होने से मायूस होकर लौटने वाले राजेश, प्रीतम व शैलेश ने कहा कि किसानों की आवाज कोई सुनने वाला नहीं है। हम सब परेशान हैं लेकिन उसे दूर करने वाला भी कोई नहीं है। कहा कि बुधवार को जब मंडी स्थित केंद्र के प्रभारियों ने खरीद से इन्कार किया तो जिम्मेदार अधिकारियों को फोन किया।
किसी भी अधिकारी का फोन नहीं उठा। अर्जुन ने कहा कि जब जिलास्तरीय अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया तो प्रमुख सचिव को फोन किया। उन्होंने बात सुनने के बजाय कहा कि अपने जिले के अधिकारियों से इस संबंध में बात करो।
धान खरीद के लिए जो नियम लागू किए गए हैं, उनका पालन करना होगा। कोई नया निर्देश आएगा तो उसका भी पालन कराया जाएगा।
-अशोक कुमार कनौजिया, एडीएम