अंबेडकरनगर। धान की फसल अब पकने वाली है। मौसम के उतार-चढ़ाव के बीच किसानों को फसल पैदा करने के श्रम का लाभ अब उन्हें मिलने वाला है।
कृषि विज्ञान केंद्र पांती के अध्यक्ष डाॅ.रामजीत का कहना है कि किसानों को फसल की कटाई, मड़ाई के पश्चात उसके भंडारण का उचित प्रबंधन नहीं करने से हानि उठाना पड़ सकता है। किसानों को वैज्ञानिक विधि से धान के भंडारण की व्यवस्था करनी चाहिए। इस दौरान उन्हें धान में नमी की मात्रा, सुरक्षित भंडारण गृह व इसमें बरते जाने वाली सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए। धान को कटाई व मड़ाई के बाद ठीक प्रकार से सूखा लेना चाहिए। धान की नमी को 25 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत तक कर लेना चाहिए। भंडारण गृह में 20 से 25 इंच ऊंचा लकड़ी का प्लेटफार्म बना कर ही बोरों को रखें ताकि नमी न मिले।