अंबेडकरनगर। इंसान को बेदार तो हो लेने दो, हर कौम पुकारेगी हमारे हैं हुसैन, नौहे के बीच शुक्रवार देर शाम मीरानपुर स्थित शाही इमामबारगाह में जुलूस-ए अजा का आयोजन हुआ। अंजुमन गुंचे दहन अकबरपुर के तत्वावधान में आयोजित जुलूस में स्थानीय व बाहरी अंजुमन के सदस्यों ने जहां नौहाख्वानी की तो वहीं उलमा ने कर्बला के शहीदों पर प्रकाश डालकर माहौल को भावुक बना दिया।
जुलूस की शुरुआत मौलाना सै. मोहम्मद अब्बास की मजलिस से हुई। मौलाना अब्बास ने कहा कि इमाम हुसैन ने इंसानियत को बचाने के लिए कर्बला में अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी। उन्होंने जालिम बादशाह के सामने सिर झुकाने की बजाय सिर कटाना मुनासिब समझा। यही वजह है कि दुनिया के कोने-कोने में इमाम हुसैन का गम मनाया जाता है।
ऐसा नहीं है कि सिर्फ शिया ही इमाम हुसैन का गम मनाते हैं, सभी मजहब के लोग इमाम हुसैन का गम मनाते हैं। कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी है कि इमाम हुसैन के मिशन कर्बला को जन-जन तक पहुंचाएं। कोई ऐसा काम न करें, जिससे किसी को ठेस पहुंचे। बाद में उन्होंने कर्बला के शहीदों पर विस्तार से प्रकाश डालकर माहौल को गमगीन बना दिया।
अंजुमन गुंचे दहन के मीडिया प्रभारी अली अंबर आशिर ने कहा कि देर रात तक चले कार्यक्रम के दौरान अंजुमन गुंचे नासिरुल अजा बड़ागांव जौनपुर, अंजुमन अजादारे हुसैनी जाफराबाद जलालपुर, अंजुमन गुलशने इस्लाम भौरा, अंजुमन गुंचे अकबरिया अकबरपुर के सदस्यों ने नौहाख्वानी व सीनाजनी की।
इस दौरान मौलाना अकबर अली वायज व मौलाना जर्रार हुसैन ने भी मजलिस को संबोधित किया। अंजुमन सचिव जामिन ने कहा कि कार्यक्रम का संचालन जौन व जैबी रिजवी ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में फजील, अस्किया, यासूब, कुमैल, औन, अली, आसिम, हुसैन का मुख्य योगदान रहा।