अंबेडकरनगर। अकबरपुर के मानिकपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन रविवार को भगवान कृष्ण के जन्म प्रसंग और उनकी लीलाओं का वर्णन किया गया। प्रवाचक जगजीवनानंद ने कहा कि भगवान का अवतार अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए होता है। जब-जब पृथ्वी पर अन्याय बढ़ता है, तब-तब परमात्मा किसी न किसी रूप में अवतरित होते हैं। परमात्मा ही परम सत्य हैं। जब मनुष्य की वृत्ति परमात्मा में लग जाती है, तब संसार का मोह स्वत: समाप्त हो जाता है। उन्होंने उदाहरण के माध्यम से समझाया कि भगवान संसार से जुड़े भी हैं और उससे अलग भी। जैसे आकाश में बादल रहते हैं और बादल के भीतर भी आकाश तत्व विद्यमान रहता है। उसी प्रकार संसार नश्वर है, लेकिन परमात्मा शाश्वत हैं। संसार की कोई भी वस्तु परमात्मा से अलग नहीं है, लेकिन परमात्मा संसार के बंधन में नहीं बंधते। प्रवाचक ने कहा कि परमात्मा नश्वर संसार से परे शाश्वत सत्य हैं। संसार में रहते हुए भी मनुष्य ईश्वर से जुड़ सकता है। मोह से मुक्त होने का मार्ग भक्ति है। अधर्म के नाश और धर्म की स्थापना के लिए सदैव संघर्ष आवश्यक है। जीवन में संतुलन, सेवा और समर्पण से शांति प्राप्त होती है। इस दौरान राजीव उपाध्याय, पप्पू सिंह, ओम प्रकाश उपाध्याय, विदेश, हिमांशु, प्रेम नारायन, बाल गोविंद, अंगद सिंह, कृष्ण उपाध्याय व अन्य उपस्थित रहे।