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93 समितियों से डीएपी नदारद

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अंबेडकरनगर। दलहनी व तिलहनी फसलों की बोआई के बीच जिले की 93 साधन सहकारी समितियों से डीएपी खाद नदारद है। सरसों, चना, मटर व आलू की बोआई के लिए एक-एक बोरी डीएपी की खातिर किसानों को भटकना पड़ रहा है। निजी दुकान से खाद लेने पर किसानों को आर्थिक चपत लग रही है।
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मौजूदा समय में सरसों, चना, मटर व आलू की बोआई चल रही है। इन फसलों की बेहतर उपज के लिए डीएपी खाद की सर्वाधिक जरूरत पड़ती है। इसके बावजूद समितियों पर डीएपी खाद ही उपलब्ध नहीं है। बीते दिनों जिले को पांच हजार चार मीट्रिक टन खाद उपलब्ध हुई थी।
93 साधन सहकारी समितियों से इनकी बिक्री की गई। मौजूदा समय में किसी भी समिति पर खाद की एक बोरी भी उपलब्ध नहीं है। इससे किसानों को मजबूर होकर निजी दुकानों से खाद खरीदनी पड़ रही है।
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जलालपुर ब्लॉक में कुल 12 साधन सहकारी समिति व भियांव में आठ साधन सहकारी समितियां हैं। किसी भी समिति पर डीएपी उपलब्ध नहीं है। गुरुवार को साधन सहकारी समिति बड़ेपुर, जीवत, रेवई, बड़ागांव, खजुरी करौंदी, किशनपुर कबिरहा, जैतपुर, अशरफपुर मजगवां समेत कई अन्य समितियों पर खाद के लिए किसान भटकते मिले। डीएपी न मिलने से उनमें मायूसी दिखी।
जमौली के किसान कल्लू वर्मा, रामशंकर व रामपुर चांडीडीहा के सुभाष ने कहा कि इन दिनों सरसों, चना व मटर की बोआई चल रही है। इसके लिए डीएपी की खास जरूरत है। समितियों से यह खाद नदारद है। ऐसे में अधिक दाम पर निजी दुकानों से खरीदनी पड़ रही है। साधन सहकारी समिति सिकंदरपुर, पहाड़पुर टड़वा, रामपुर रामपट्टी, जल्लापुर, मसेड़ा, बीजेगांव की भी समितियों पर खाद नदारद मिली।
बसखारी विकास खंड के बसखारी प्रथम, द्वितीय, हरैया, मसड़ा मोहनपुर, तरौली मुबारकपुर, दौलतपुर हाजलपट्टी, सिंहपुर समेत कई अन्य समितियों पर भी डीएपी नदारद रही। समितियों पर किसान खाद के लिए आए लेकिन उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। हरैया में मिले रामप्रकाश व मसड़ा में मिले संतराम ने कहा कि इसी समय तो डीएपी की अत्यंत जरूरत है। ऐसे समय में खाद के न होने से समस्याएं खड़ी हो रही हैं। निजी दुकानों से खाद लेनी है। इससे आर्थिक चपत भी लगेगी।
जहांगीरगंज विकास खंड की किसी भी समिति पर खाद नहीं है। जहांगीरगंज, देवरिया पंडित, अलऊपुर समेत कई अन्य समितियों से किसानों को मायूस होकर लौटना पड़ा। किसान राममिलन तिवारी, अजय सिंह, विनोद पांडेय, सुधीर सिंह, विनोद तिवारी व चनई निषाद ने कहा कि डीएपी की उपलब्धता सुचारु रूप से हो सके, इसके लिए जिम्मेदारों द्वारा तनिक भी गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। यदि समय रहते खाद न मिली तो इसका प्रतिकूल प्रभाव सरसों, चना व मटर की बोआई पर पड़ेगा।
भीटी ब्लॉक के तेजापुर व मदारभारी साधन सहकारी समिति पर पता चला कि डीएपी नहीं है। कब आएगी इसकी जानकारी समिति प्रभारी नहीं दे सके। तेजापुर में मिले योगेंद्र सिंह व मदारभारी में मिले रामकिशुन ने कहा कि एक तो पहले से ही किसान विभिन्न मुश्किलों से संघर्ष कर रहे हैं, उस पर अब खाद की समस्या बढ़ गई है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि जब जरूरत होती है तो खाद नदारद हो जाती है।
उपकृषि निदेशक पीयूष राय ने कहा कि किसानों को चिंता करने के बजाय सिंगल सुपर फास्फेट खाद का प्रयोग करना चाहिए। यह खाद जिले में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध भी है। यह खाद भी डीएपी की तरह ही मिट्टी में काम करती है। जिले में मौजूदा समय में 5700 मीट्रिक टन सिंगल सुपर फास्फेट उपलब्ध है। डीएपी की भी जल्द ही पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
सरकारी गोदामों पर डीएपी की 1350 रुपये प्रति बोरी की दर से बिक्री होती है। यह खाद मुख्य रूप से सरकारी समितियों से ही किसानों को उपलब्ध होती है। निजी दुकानों पर इस खाद की बिक्री का जोर नहीं रहता लेकिन 1370 से 1380 रुपये तक में किसानों को उपलब्ध कराई जाती है।
पीसीएफ गोदाम बरधाभिउरा में 975 एमटी डीएपी खाद है। डीएम की स्वीकृति के बाद समितियों पर खाद भेजे जाने का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा 5200 एमटी खाद के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। उपलब्ध होते ही समितियों पर भेज दी जाएगी।
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-सुशील कुमार, पीसीएफ प्रबंधक
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