अंबेडकरनगर। किसानों को फसल सिंचाई के लिए जब पानी की सबसे ज्यादा जरूरत है तो 758 किमी. लंबाई में फैली तीन प्रमुख नहरों व 130 माइनरों में इन दिनों धूल उड़ रही हैं। भीषण गर्मी व तेज धूप के बीच नहरों में पानी न होने से पौने दो लाख किसानों के समक्ष सिंचाई का संकट खड़ा हो गया है। मेंथा व गन्ने की फसल को सिंचाई की जरूरत है। ऐसे में सिंचाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना महंगा पड़ रहा है।
सिंचाई के लिए नहरों पर निर्भर लगभग पौने दो लाख किसान मौजूदा समय में मुश्किल में हैं। दरअसल गन्ना व मेंथा की फसल को सिंचाई की जरूरत है। मालूम हो कि शारदा सहायक नहर, टांडा मुख्य नहर व टांडा समांतर नहर समेत कुल 130 छोटी बड़ी माइनर हैं। इन दिनों नहर में पानी न होने से किसान परेशान हैं। साधन संपन्न किसान तो वैकल्पिक व्यवस्था कर सिंचाई कर ले रहे हैं लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को नहर में पानी आने का इंतजार है। पानी कब आएगा इसे बताने वाला कोई नहीं है। किसानों का कहना है कि समय रहते नहर में पानी नहीं आया तो गन्ना व मेंथा की फसल को नुकसान हो सकता है।
फसलों को हो सकता नुकसान
फोटो 7 लोदीपुर निवासी मोहम्मद तौफीक ने कहा कि अभी मेंथा व गन्ना की सिंचाई अत्यंत जरूरी है। शारदा सहायक नहर में पानी नहीं है। अब तक नहर में पानी आ जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हो सका है। यदि समय रहते सिंचाई नहीं हुई तो दोनों फसलों को नुकसान होगा।
किसानों की करें परवाह
फोटो 8 जमुनीपुर के रामअशीष ने कहा कि सिंचाई विभाग के जिम्मेदारों को किसानों के हित की कोई परवाह ही नहीं है। जब सिंचाई की सख्त जरूरत है तो नहर में पानी ही नहीं है। गन्ने व मेंथा की सिंचाई करनी है। नहर में पानी न होने से वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।
21 तक पानी आने की उम्मीद
21 जून तक नहरों में पानी आने की पूरी संभावना है। 13 जून को शरदा नगर लखीमपुर खीरी से नहर में पानी छोड़ा जाएगा। इसके बाद लखनऊ, बाराबंकी व अयोध्या होते हुए जिले में पहुंच जाएगा। - शिवप्रताप सिंह, अधिशाषी अभियंता सिंचाई खंड टांडा