नौकरी दिलाने के बहाने दलित महिला से दुष्कर्म मामले में अपर जनपद न्यायाधीश शंकरलाल ने अभियुक्त को दस वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। उस पर 20 हजार का अर्थदंड भी लगाया गया है।
अकबरपुर कोतवाली में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के निर्देश के बाद 20 अगस्त 2013 को हंसवर थाना क्षेत्र की एक दलित महिला ने दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था।
इसमें कहा गया था कि उसका पति नौकरी के सिलसिले में बाहर रहता है। उसे आंगनबाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर नरकटा निवासी एक व्यक्ति दुर्गेश ने झांसा दिया और 1 लाख रुपये का प्रबंध करने को कहा। 20 फरवरी 2013 को उसने 1 लाख रुपये दे भी दिए। 20 मार्च को दुर्गेश उसके घर आया और इंटरव्यू होने का हवाला देकर अकबरपुर ले आया।
यहां अगले दिन साक्षात्कार होने की बात कहकर एक कमरे में रोक दिया और इसके बाद चाकू की नोक पर उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस से शिकायत के बाद जब केस नहीं दज हुआ, तो कोर्ट की शरण ली गई। इसी मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या दो शंकरलाल ने दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अर्थदंड अदा न करने पर दो वर्ष के अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा भुगतनी होगी। न्यायाधीश ने दुष्कर्म के मामले में पीड़ित महिला को 50 हजार रुपये प्रतिकर दिए जाने का निर्देश दिया। इसके अलावा विभिन्न अर्थदंड के आधे हिस्से के तौर पर 15 हजार अतिरिक्त भी दिए जाने का निर्देश दिया गया।