दहेज हत्या मामले में न्यायालय ने पति व ससुर को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इन पर दो हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। जहांगीरगंज थाना क्षेत्र के रामकोला निवासी श्रीपति ने पांच वर्ष पूर्व आलापुर थाने में केस दर्ज कराया था।
इसमें कहा था कि उसने पुत्री नीरज का विवाह वर्ष 2008 में आलापुर के लाड़िलापुर निवासी रामधारी के पुत्र राकेश के साथ किया था। एक वर्ष बाद गौना जाने के बाद से ही उसकी पुत्री का उत्पीड़न दहेज के लिए शुरू कर दिया गया। सात अप्रैल 2010 की रात रामधारी ने फोन कर बताया कि उसकी पुत्री मर गई है।
वह तत्काल गांव पहुंचा तो देखा कि बेटी फंदे पर झूल रही है। इसके बाद पति, सास-ससुर, जेठ व जेठानी के विरुद्ध केस दर्ज कराया था। पुलिस ने इन सभी को गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया था। वहां से बाद में जमानत मिल गई थी। इस बीच यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ।
अपर जनपद न्यायाधीश फास्ट ट्रैक प्रथम वीके जायसवाल ने इसमें जेठ दिलीप व जेठानी यशोधरा समेत सास समुद्रा को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। पति राकेश व ससुर रामधारी को दहेज हत्या के आरोप में दोषी पाते हुए दस दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।