किशोरी के अपहरण व दुष्कर्म के मामले में बड़ा फैसला देते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक वीके जायसवाल ने दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही उस पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
वर्ष 2012 में अलीगंज थाने में दर्ज कराए केस में सुरेश (परिवर्तित नाम) ने कहा था कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री को घर के निकट से कट्टे की नोक पर रात को गांव के ही रक्षा राम उर्फ अनुराग यादव ने उस समय अपहृत कर लिया जब वह बहन के घर से लौट रही थी।
इसके बाद एक फैक्ट्री के पास बने कमरे में ले जाकर दुष्कर्म किया। रात दो बजे आरोपी ने किशोरी के पिता को फोन कर बुलाया और किशोरी को हवाले कर दिया। अगले दिन सुबह जब उसने आरोपी से इस बारे में पूछताछ की तो उसने ईंट से हमला कर दिया, जिससे उसके अंगूठे की हड्डी टूट गई।
अलीगंज पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध दुष्कर्म व कई अन्य धाराओं में केस दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी और अभियुक्त को गिरफ्तार कर चालान कर दिया। वह इन दिनों न्यायिक अभिरक्षा में मंडल कारागार फैजाबाद में निरुद्घ है।
इस बीच मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। इसमें ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक वीके जायसवाल ने दुष्कर्म व अपहरण के मामले में आरोपी को दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
न्यायाधीश ने फैसले में कहा कि रात में 5 घंटे तक बंधक बनाकर रखने व घात लगाकर अपहरण करने के बाद दुष्कर्म करने और उसके बाद पिता को घायल करने का मामला अत्यंत गंभीर है।
ऐसे में दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी जाती है। दोषी पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। बताते चलें कि जेल जाने के बाद से ही अभियुक्त को अब तक जमानत नहीं मिली थी, वह अभी भी कारागार में है।