दहेज हत्या के मामले में कोर्ट ने पति समेत पांच लोगों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। पांचों पर पांच-पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वर्ष 2008 में 11 जून को अकबरपुर थाना क्षेत्र के सेखपुरा कयामुद्दीनपुर गांव निवासी श्रीराम राजभर ने सम्मनपुर थाने में दहेज हत्या की प्राथमिकी दर्ज करायी थी।
उसने पुत्री सुशीला का विवाह सम्मनपुर थाना क्षेत्र के टड़वा गोपालपुर निवासी अनिल पुत्र भागीरथी राजभर के साथ किया था। विवाह के समय उसने दान दहेज भी दिया था। शादी के कुछ दिन बाद ही उसकी पुत्री को दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। ससुराल पक्ष के लोग दहेज में बाइक मांगने लगे।
इसे लेकर कई बार पुत्री की पिटाई भी की। उनकी पुत्री को प्रताड़ित करने में पति अनिल समेत जेठ नंदलाल, गोवर्धन, सास गेना देवी व जेठानी शीला शामिल थीं। कई बार वह घर जाकर आपत्ति जताने के साथ ही सुलह समझौता करा चुका था। 11 जून को उसे सूचना मिली कि उनकी पुत्री की मौत हो गई है।
पुलिस ने मामले में हत्या व साक्ष्य छिपाने की धाराओं में केस दर्ज कर आरोपियों के विरुद्घ चार्जशीट दाखिल की थी।
यह मामला सत्र परीक्षण के लिए पेश हुआ। अपर सत्र न्यायाधीश चतुर्थ अनिल कुमार ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद मामले में पांचों को दोषी पाया। सभी आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई।