विद्युतनगर (अंबेडकरनगर)। एनटीपीसी द्वितीय चरण विस्तारीकरण के लिए भारी पुलिस बल के बीच प्रशासन ने बुधवार को हाशिमपुरा गांव में अधिग्रहीत भूमि पर बने 13 परिवारों के निर्माण पर बुलडोजर चला दिया। अचानक हुए इस कार्रवाई से इलाके में हाहाकार मच गया। गरजती मशीनों की चपेट में आकर मकान, नलकूप, पशुशाला, शौचालय व पेड़ जमींदोज हो गए। स्थाई व अस्थाई दोनों तरह के निर्माणों की प्रक्रिया अमल में लाई गई। पूरी कार्रवाई को अमल में लाने के लिए प्रशासन ने गांव की तरफ जाने वाले मार्ग पर प्रवेश प्रतिबंधित कर रखा था। मीडियाकर्मियों तक को पूरी प्रक्रिया के दौरान मौके पर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
एनटीपीसी द्वितीय चरण के विस्तारीकरण के लिए भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई पूर्व में ही अमल में लाई जा चुकी थी। ज्यादातर गांव में भूूमि पर कब्जे की कार्रवाई भी प्रशासन ने पूरी कर ली थी। इस बीच हाशिमपुरा के 13 परिवार आबादी की भूमि छोड़ने को राजी नहीं हो रहे थे। प्रशासन ने इनके लिए जरूरी मुआवजा ऐसे में कोर्ट में जमा करा दिया था। संबंधित परिवारों को अधिग्रहीत भूमि खाली करने के लिए नोटिस भी दिया गया, लेकिन इसके बावजूद परिवारों ने कब्जा नहीं खाली किया। इस बीच एक बार फिर से नए सिरे से नोटिस जारी कर संबंधित ग्रामीणों को कब्जा छोड़ने के लिए कहा गया। इस बार भी उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद बुधवार को पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की टीम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गई। वहां जेसीबी व बुलडोजर मशीनें पहले से मौजूद थीं। अभियान का नेतृत्व एडीएम गिरिजेश त्यागी व एएसपी अशोक कुमार राय के अलावा एसडीएम टांडा कोमल यादव व सीओ केके मिश्र ने किया।
प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों को संबंधित स्थान से अपने अपने-सामान निकालने मोहलत दी। इसके बाद मशीनों के माध्यम से अधिग्रहीत भूमि पर कब्जे का अभियान शुरू हुआ। इसमें कुल 13 परिवारों का स्थाई व अस्थाई निर्माण प्रभावित हुआ। इसमें घर से लेकर ट्यूबवेल, टीन शेड, पशुशाला व शौचालय आदि शामिल रहा। मशीनों ने स्थाई व अस्थाई निर्माण को जमींदोज करने के साथ ही वहां लगे पेड़ों को भी गिराने का काम शुरू कर दिया। लगभग चार घंटे तक चले इस अभियान के दौरान पुलिस बल चारों तरफ मौजद रहा। मौके पर कोई हंगामा न होने पाए, इसलिए टांडा फैजाबाद मार्ग से हाशिमपुरा जाने वाले लिंक मार्ग पर आवागमन ठप करते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। किसी भी व्यक्ति को गांव की तरफ जाने की छूट नहीं थी। मीडियाकर्मियों तक को अभियान के दौरान गांव में जाने की अनुमति नहीं प्रदान की गई। कोई वहां पहुंच भी गया, तो कैमरा व मोबाइल निकालने से मना किया जाता रहा। शाम पांच बजे तक प्रशासन ने सभी निर्माण ढहाते हुए अधिग्रहीत भूमि पर कब्जे की कार्रवाई पूरी कर ली।
प्रभावित हुए यह परिवार
सर्वजीत, जगताराम, अवधेश, विजयी, जगदीश, मदनमोहन, विक्रमादित्य, कमलेश, घिर्राऊ व दीप कुमार आदि उन लोगों में शामिल हैं, जिनका स्थाई व अस्थाई निर्माण ढहाया गया। जगतराम, अवधेश व बालगोविंद आदि का आरोप था कि प्रशासन ने सामान निकालने के लिए सिर्फ दो घंटे का समय दिया। कहा कि उन सबने मुआवजा भी नहीं लिया है। इसके बावजूद जबरन उन्हें बेदखल कर दिया गया। ठंड के इस मौसम में अब वे सब परिवार के साथ आखिर कहां जाएं। कहा गया कि प्रशासन की इस कार्रवाई में उनका राशन तथा कई अन्य जरूरी सामान भी मलबे में दब गया।
रेल लाइन निर्माण में हो रहा था व्यवधान
एनटीपीसी विस्तारीकरण क्षेत्र में रेल लाइन निर्माण का कार्य गति पकड़ रहा है। यह रेल लाइन हाशिमपुरा गांव से ही होकर जानी है। तहसीलदार सुदामा वर्मा के मुताबिक संबंधित परिवारों को डीएम व अन्य अधिकारियों के साथ कई चक्र की बैठक में भूमि खाली करने के लिए समझाया गया। बताया गया कि उनके रवैये के चलते विस्तारीकरण में व्यवधान हो रहा है। उनके न मानने पर ही यह कार्रवाई अमल में लाई गई। संबंधित भूमि पर कब्जे की कार्रवाई पूरी कर ली गई है। अब वहां रेल लाइन निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई प्रक्रिया
एडीएम गिरिजेश त्यागी ने कहा कि कुल 13 परिवारों के स्थाई व अस्थाई निर्माण हटाए गए हैं। पूरी प्रक्रिया अत्यंत शांतिपूर्ण ढंग से चली। लगभग इन सभी परिवारों के घर उनके मूल गांव में हैं। यह गांव के बाहरी के हिस्से में की गई कार्रवाई थी। इसलिए रहने का कोई संकट नहीं था। फिर भी एहतियातन गांव के बाहर एक कैंप का प्रबंध किया गया था, जिससे किसी को कोई असुविधा न होने पाए। एएसपी अशोक कुमार राय ने कहा कि अधिग्रहीत भूमि पर कब्जे की कार्रवाई के दौरान पुलिस प्रशासन ने पूरा संयम बरता। यह निर्देश पहले से दिए गए थे कि कार्रवाई के दौरान किसी से कोई अभद्र व्यवहार नहीं होगा।