अंबेडकरनगर। जिले में खून के काले कारोबार को रोकने के लिए बेफिक्री का माहौल है। डेढ़ वर्ष पूर्व बसखारी के एक पैथॉलाजी सेंटर पर कार्रवाई तब की गई, जब यहां खून का काला कारोबार पकड़ने के बाद खूब हंगामा हुआ। हाल फिलहाल नकली खून देने का कोई मामला तो सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार अकबरपुर, टांडा व बसखारी क्षेत्रों में यह काम अभी भी चोरी छिपे चला आ रहा है। लंबा अरसा बीत गया, जब स्वास्थ्य विभाग ने नकली खून का कारोबार रोकने के लिए जिले में प्रत्यक्ष तौर पर कोई अभियान चलाया हो।
जिले में भी ब्लड के काले कारोबार का मामला सामने आ चुका है। लगभग डेढ़ वर्ष पहले बसखारी बाजार स्थित एक पैथालॉजी सेंटर पर अपर सीएमओ के नेतृत्व में टीम ने छापा मारकर ब्लड के कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए दो यूनिट ब्लड मौके से बरामद किया था। लाइसेंस निलंबित करते हुए सेंटर को सीज कर दिया गया था। यह अभियान उस समय स्वास्थ्य विभाग ने चलाया था, जब नकली खून का कारोबार जिले में पनपने की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं। कार्रवाई के नाम पर स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवालिया निशान खड़े होने लगे थे। जब इसे लेकर हो हल्ला अधिक मचने लगा, तो स्वास्थ्य विभाग की आंख खुली और छापा मारकर मामले का खुलसा किया।
बताते चलें कि जिले में मात्र दो स्थानों पर ब्लड बैंक का संचालन हो रहा है। एक जिला अस्पताल में, तो दूसरा राजकीय मेडिकल कॉलेज सद्दरपुर में। निजीस्तर पर जिले में कहीं भी ब्लड बैंक का संचालन नहीं हो रहा है, लेकिन चोरी छिपे अकबरपुर, टांडा व बसखारी क्षेत्र में नकली खून का कारोबार हो रहा है। पूर्व में इक्कादुक्का मामले सामने आने के बावजूद इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग तनिक भी गंभीर नहीं हो रहा है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लंबे समय से प्रत्यक्ष तौर पर किसी प्रकार का अभियान नहीं स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं चलाया जा सका है। इसके चलते ही जिले के विभिन्न क्षेत्रें में ऐसे पैथालॉजी सेंटर का भी संचालन धड़ल्ले से हो रहा है, जिनका या तो लाइसेंस नहीं है या फिर लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया जा सका है।
पहले किया सीज, फिर दी क्लीन चिट
लगातार मिल रही शिकायतों के बीच लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बसखारी बाजार स्थित एक पैथालाजी सेंटर पर छापा मारकर अवैध ढंग से रखे गए दो यूनिट ब्लड को बरामद किया था। उस समय कार्रवाई करते हुए न सिर्फ सेंटर को सीज कर दिया था, बल्कि लाइसेंस भी निलंबित कर दिया गया था। हालांकि लगभग दो माह बाद जांच के बाद सेंटर को क्लीन चिट दे दिया गया, जिससे मौजूदा समय में सेंटर का संचालन हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्य प्रणाली पर उस समय लोगों ने सवालिया निशान भी खड़ा किया था।
पैथालॉजी सेंटरों की भी हो जांच
सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. रमाकांत मिश्र ने कहा कि कहने को जिले में मात्र दो ब्लड बैंक संचालित हैं, लेकिन कुछ पैथालाजी सेंटर पर इसका अवैध कारोबार हो रहा है, जैसा कि लगभग डेढ़ वर्ष पहले मामला सामने आया था। ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों को समय-समय पर पैथालॉजी सेंटरों की भी सघन जांच करनी चाहिए। यदि कहीं ऐसा पाया जाता है, तो संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
समय-समय पर चलता अभियान
जिले में सिर्फ दो ब्लड बैंक हैं। एक जिला अस्पताल में, तो दूसरा राजकीय मेडिकल कॉलेज में। जिले में निजी ब्लड बैंक नहीं हैं। समय-समय पर अभियान चलाकर पैथालाजी सेंटरों की जांच की जाती है। -डॉ. अशोक कुमार, सीएमओ