अंबेडकरनगर। बाराबंकी में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने पूर्व में जिले में जहरीली शराब पीने से हुई घटनाओं को ताजा कर दिया है। शराब ने आश्रितों की जिंदगी खराब कर दी है। हादसे के शिकार लोगों के आश्रितों की जफिंदगी मुफलिसी में कट रही है। जानलेवा अवैध शराब या ताड़ी की बिक्री रोकने के लिए जिले में भी अभियान फर्ज अदायगी से आगे बढ़ नहीं पाता। गर्दन बचाने के लिए छिटपुट छापों की औपचारिकता छोड़ दी जाए, तो पूर्व के वर्षों में जहरीली ताड़ी पीने से हुई मौतों को लेकर भी आबकारी विभाग या प्रशासन कभी गंभीर नजर नहीं आया। पिछले पांच वर्ष के भीतर हुई दो मौत से प्रभावित परिवार के लोग आर्थिक तंगी से जूझ रहे। अवैध कारोबार के चलते ही उनके परिवार के मुखिया को असमय जान गंवानी पड़ी, जिसका खामियाजा संबंधित परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में अवैध शराब का सिलसिला रोके नहीं रुक रहा। शासनस्तर पर जब तब विशेष अभियान भी निर्धारित किए जाते हैं, लेकिन जिले में वह सब सिर्फ फोटो खिंचाने तथा कागजी औपचारिकता पूरी करने के सिवा इसके आगे नहीं बढ़ पाता। नतीजा यह कि अवैध ताड़ी व अवैध शराब का दंश समय समय पर भुगतना पड़ता हैै। बीते दिनों बाराबंकी के देवा क्षेत्र में अवैध शराब पीने से मौत की घटना सामने आने के बाद ऐसे मामलों को लेकर जिले को मिले जख्म भी ताजे हो उठे हैं। यहां भी बीते पांच वर्ष में अवैध शराब व ताड़ी से दो मौत होने का मामला सामने आया है। प्रशासन ने इन दोनों मामलों में ही मौत का कारण अवैध शराब व ताड़ी मानने से इंकार कर दिया था, लेकिन परिवारीजनों के लिए मिलावटी शराब व मिलावटी ताड़ी ने जीवन भर के लिए तगड़ा दर्द दिया है।
ताड़ी से मौत के बाद भी नहीं हुआ पोस्टमार्टम
केस एक
सम्मनपुर थाना अन्तर्गत खानूपुर जलहिया गांव निवासी राजेंद्र (35) पुत्र रामसुमेर की की मौत परिवारीजनों के अनुसार 15 मार्च 2017 को ताड़ी पीने से हो गई थी। जलालपुर प्रतिनिधि के गुरुवार को घर पर मिले (12) वर्षीय पुत्र रोहित के अनुसार उसके पिता हजपुरा बाजार स्थित एक दुकान से ताड़ी पीकर घर आए। खाना खाने के कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। पत्नी ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस के साथ-साथ आबकारी विभाग से भी की गई, लेकिन पोस्टमार्टम कराने तक के लिए पुलिस नहीं पहुंची। और तो और अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। न तो ताड़ी दुकानदार के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई हुई और ही पीड़ित परिवार को किसी प्रकार की शासन प्रशासन से आर्थिक सहायता ही मिली। इससे पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है।
तीन वर्ष तक करती रही न्याय का इंतजार
केस दो
10 फरवरी 2013 को हंसवर थाना अन्तर्गत जैनुद्दीनपुर गांव निवासी जुल्फेकार उर्फ भुट्टू की उस समय मौत हो गई, जब वह मैंदी गांव स्थित दुकान से ताड़ी पीकर निकला हुआ था। दुकान के समक्ष ही उसकी मौत हो गई थी। हंसवर प्रतिनिधि के अनुसार सूचना पर पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम तो कराया, लेकिन संबंधित दुकानदार के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। गुरुवार को गांव जाने के दौरान मौके पर मिली तीन पुत्रों के लालन पालन की जिम्मेदारी निभा रही उसकी पत्नी सैय्यदा खातून ने कहा कि मामले में प्रशासन का रवैया अत्यंत दुखद है। दुकानदार के विरुद्ध किसी प्रकार की कार्रवाई ही नहीं की गई। शासन या प्रशासन स्तर से किसी प्रकार की मदद भी नहीं मिली। कहा कि 3 वर्ष तक जब संबंधित अधिकारियों द्वारा किसी प्रकार की सुध नहीं ली गई, तो बच्चों के भविष्य को देखते हुए उसने अपने देवर से निकाह कर लिया।
एसटीएफ ने पकड़ा था कारखाना
जिले में अवैध शराब का कारोबार कितने बड़े पैमाने पर फैला है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एसटीएफ गोरखपुर ने लगभग एक वर्ष पहले अहिरौली थाना क्षेत्र के अहिरौली में छापा मारकर अवैध शराब बनाने के बड़े कारखाने का पर्दाफाश किया था। एसटीएफ ने इसका मुकदमा भी अहिरौली थाने में कराया था। खास बात यह कि बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनने के बावजूद न तो इसकी जानकारी अहिरौली पुलिस को हो सकी थी और न ही जिले के आबकारी महकमे को।
नहीं हुई कोई भी मौत
जिले में अवैध शराब या ताड़ी से कोई भी मौत नहीं हुई है। अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए आबकारी विभाग के साथ राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक छापेमारी की थी। अभियान का नेतृत्व जिलाधिकारीस्तर से हुआ था। इसमें बड़ी सफलताएं भी मिली थीं। कई जगहों पर अवैध शराब बनाने के उपकरण बनाने के साथ ही संबंधित पर कार्रवाई की गई थी। -राजकुमार, जिला आबकारी अधिकारी